कविताभाषा-साहित्य

आसाँ नहीं किसी के दिल में जगह बनाना – श्वेता साँची

कविता

खुद को तबाह कर के आखिर ये हम ने जाना ,
आसां नहीं किसी के दिल में जगह बनाना
झोली तेरी भरी गर रौशन भी घर है तेरा,
इक प्रेम का तू दीपक मुफलिस के घर जलाना
बचपन था वो निराला क्या दौर था सुहाना ,
प्यारा सा मां का आंचल वो गोद में बिठाना
बन आदमी देखो खुद को समझे वो खुदा है ,
औरत ने जन्मा उसको तुम आइना दिखाना
शिकवा करू न रब से बस इल्तिज़ा यही है,
गुलशन मिले ना गर फिर खारो से घर सजाना
एहसान तेरा हम पर कुछ इस कदर हुआ है,
ग़म की शक्ल में तेरा इस ज़िन्दगी में आना
अश्को से वास्ता मेरे  दर्द से  न नाता ,
तुम कौन हो मेरे फिर कैसा ये हक जताना
श्वेता साँची, जबलपुर, मध्यप्रदेश.
अगर आप साहित्यकार हैं तो आप भी अपनी अप्रकाशित रचनाएँ हमें भेज सकते हैं
अपनी रचनाएँ हमें ईमेल करें : gaamgharnews@gmail.com
या व्हाट्सप्प करें: +919523455849

यह भी पढ़ें  समस्तीपुर जिला के आरटीपीएस कर्मी की कमी के कारण नहीं बन पा रहा है किसी प्रकार का प्रमाण पत्र

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button