कविता
कविता; “किसान की हुंकार” – एन मंडल
किसान की मेहनत, संघर्ष और अधिकारों की बात करती यह पंक्तियां देश के अन्नदाता को सम्मान देने और उनकी आवाज़ बनने का संदेश देती हैं।

“किसान की हुंकार”
मिट्टी से रिश्ता, पसीने से पहचान,
धरती का बेटा है भारत का किसान।
धूप में जलकर अन्न उगाता है,
हर घर की थाली सजाता है।
अब वक्त है उसकी आवाज़ बनने का,
किसान के हक को पहचानने का।
जब किसान मजबूत होगा इस देश में,
तभी समृद्ध होगा भारत हर परिवेश में।
~ एन मंडल



