डिजिटल करेंसी से राशन वितरण, जानिए पायलट और फायदे’
अब डिजिटल करेंसी से मिलेगा राशन: कहाँ-कहाँ होगा पायलट, कैसे काम करेगा और किसे होगा फायदा?
नई दिल्ली : भारत में खुदरा ग्राहकों के लिए सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) को इस साल के अंत तक चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाने की तैयारियाँ तेज हैं। फिलहाल जो डिजिटल रुपया (CBDC) B2B स्तर पर पायलट मोड में चल रहा था, उसे अब सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में ‘डिजिटल फूड कूपन/राशन’ के रूप में परीक्षण किया जा रहा है ताकि सब्सिडी का पारदर्शी और त्वर्य वितरण सुनिश्चित किया जा सके। India सरकार ने गुजरात में शुरू किए गए एक पायलट को इस पहल का पहला कदम बताया है।
कहाँ-कहाँ पायलट चल रहा/चलेगा
सरकारी कार्यक्रम के तहत गुजरात के कुछ जिलों में पहले चरण का पायलट शुरू हो चुका है, जिसमें हजारों पंजीकृत परिवारों को डिजिटल कूपन (CBDC टोकन) उनके ई-वॉलेट में क्रेडिट किए जा रहे हैं। अगले चरण में केंद्रशासित प्रदेशों — पुडुचेरी और चंडीगढ़ — में भी मुफ्त राशन के लिए CBDC पायलट लॉन्च करने की योजना है ताकि शहरी और विशेष भूगोलों में सिस्टम की व्यवहारिकता जाँची जा सके।
कैसे काम करेगा — तकनीक और सीमा
पायलट के तहत पात्र परिवारों के ई-वॉलेट में RBI-ऑथराइज़्ड डिजिटल करेंसी (e₹) के रूप में ‘डिजिटल फूड कूपन’ दिए जाएंगे। यह कूपन एक कोड/QR के रूप में होगा जिसे राशन दुकान पर दिखाकर लाभार्थी अपना अनाज ले सकेगा — भुगतान सिर्फ़ राशन के लिए सीमित रहेगा और किसी अन्य लेन-देन के लिए उपयोग नहीं किए जाने का नियम लागू होगा। बैंक-आधारित e₹ वॉलेट और मौजूदा यूपीआई/QR इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ इंटरऑपरेबिलिटी पर भी काम हो रहा है। इसी कड़ी में बैंक-लेवल वॉलेट और ऐप समाधान तैयार कर रहे हैं ताकि लाभार्थियों को सुविधा हो।
किसे होगा फायदा — लाभार्थी और प्रणालीगत सकारात्मकताएँ
डिजिटल फूड कूपन से मुख्यतः निम्नलिखित लाभ उम्मीद किए जा रहे हैं — (1) सब्सिडी का सीधा और पारदर्शी ट्रांसफर जिससे लीक कम होगी; (2) राशन वितरण में कम भ्रष्टाचार और मनमानी; (3) स्मार्ट/फीचर फोन यूजर्स के लिए वैकल्पिक मैकेनिज्म (QR, SMS-OTP वगैरह) ताकि बहुसंख्यक लोग इसका लाभ उठा सकें; (4) आपूर्ति-श्रृंखला और स्टॉक ट्रेसबिलिटी बेहतर होगी। गुजरात पायलट में उम्मीद जताई जा रही है कि ये फायदे जमीन पर सकारात्मक असर दिखाएंगे।
अंतरराष्ट्रीय आयाम — BRICS और सहयोग
रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) और सरकार BRICS मंच पर भी CBDC इंटरऑपरेबिलिटी पर चर्चा आगे बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। RBI ने BRICS देशों के बीच डिजिटल करेंसी लिंक करने का प्रस्ताव SUMMIT एजेंडा पर रखने की सिफारिश की है, जिससे भविष्य में क्रॉस-बॉर्डर भुगतान और लेन-देन में सुगमता आ सकती है — हालांकि यह पूरी तरह तभी संभव होगा जब सभी सदस्य देशों के तकनीकी और नीतिगत रुख अनुकूल हों।
UPI, बैंक-एप और शुल्क संबंधी चिंताएँ
UPI इकोसिस्टम को और सहज बनाने के लिए बैंक अपने UPI-समर्थित ऐप विकसित कर रहे हैं; उदाहरण के तौर पर बड़े बैंक पहले ही YONO जैसे वॉलेट/ऐप के माध्यम से UPI और CBDC इंटीग्रेशन पर काम कर रहे हैं। साथ ही कुछ समय पहले उठी खबरों के बीच सरकार ने स्पष्ट किया है कि UPI पर सामान्य उपयोगकर्ताओं से कोई नया शुल्क लगाने की योजना नहीं है; डिजिटल भुगतान सुविधा बनी रहे, यही प्राथमिकता है।
क्या ध्यान देने की जरूरत है
पायलट का विस्तार होने पर गोपनीयता, साइबर-सुरक्षा, inclusion (विशेषकर फीचर-फोन उपयोगकर्ता) और लॉजिस्टिक चुनौतियों को प्राथमिकता से निपटाने की जरूरत होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि पायलट में हासिल सीख के आधार पर ही खुदरा CBDC के बड़े पैमाने पर रोल-आउट के निर्णय लिए जाने चाहिए।
संक्षेप में, डिजिटल करेंसी-आधारित राशन पायलट पारदर्शिता और कुशलता लाने का वादा करता है — पर इसकी सफलता तकनीकी, प्रशासनिक और सामाजिक चुनौतियों पर निर्भर करेगी।





