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सावधान! बिहार में पकड़ौआ विवाद; राजनीति का नया दस्तावेज

सावधान! पकड़ौआ उम्मीदवार बनने से बचें, कुर्ता पैजामा पहनकर कुछ जिला में ना निकले; जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार का यह ट्वीट हो रहा तेजी से वायरल

Lok Sabha Election 2024: बिहार के राजनीतिक दलों में चल रहे पकड़ौआ विवाद ने एक बार फिर राजनीतिक घमासान को चिंगारी लगा सकती है। आपको बता दे कि हाल ही में पटना हाई कोर्ट द्वारा पकड़ौआ विवाहों को लेकर की गई टिप्पणी दी है बता दे कि बिहार में कानूनी बंदिशों के बावजूद पकड़ौआ विवाह खबरें आ आती रहती हैं। इसी बीच, जेडीयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने एक ट्वीट के माध्यम से बिहार के कुछ क्षेत्रों में पकड़ौआ विवाह के बहाने पकड़ौआ उम्मीदवार बनने से बचने की सलाह दी है।

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नीरज कुमार ट्वीट (एक्स) पर लिखा
“पकड़ौआ विवाद से दूर रहें! पटना साहिब, मुजफ्फरपुर, महाराजगंज, समस्तीपुर, सासाराम, और पश्चिमी चंपारण के क्षेत्रों में कुर्ता-पैजामा पहनकर न जाएं। अन्यथा, कांग्रेस का उम्मीदवार बना दिया जा सकता है। सतर्क और सावधान रहें।” “एनडीए के घटक दल द्वारा कांग्रेस को उम्मीदवार ढूंढने में कठिनाई का आरोप है। प्रत्याशियों को जबरन टिकट दिए जा रहे हैं। नीरज कुमार का यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।”

नीरज कुमार का इस बयान का मकसद स्पष्ट है – राजनीतिक दलों को प्रत्याशी ढूंढने में कठिनाई का सामना हो रहा है, इसलिए वे अपनी राजनीतिक रणनीति के तहत इस अवसर का फायदा उठा रहे हैं। इस ट्वीट में उन्होंने कुछ निर्देश भी दिए हैं, जिसके अनुसार पकड़ौआ उम्मीदवार बनने से बचने के लिए विशेष क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है। इससे स्पष्ट होता है कि उनका इशारा किसी विशेष राजनीतिक दल कांग्रेस पार्टी की तरफ जाने की दिशा में है।

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राजनीतिक दलों के अधिकांश उम्मीदवारों की नामांकन प्रक्रिया राजनीतिक दलों के लिए यह एक महत्वपूर्ण और स्वाभाविक तकनीक होती है जिसे उन्होंने अपनी रणनीतिक खेल खेलने में उपयोग करते हैं। बिहार के राजनीतिक मंचों में पकड़ौआ विवाद की बातें अब तकनीकी नहीं हैं, बल्कि यह एक राजनीतिक संकेत है जो दिखाता है कि चुनावी युद्ध में हर एक जगह का महत्व है। जितना बड़ा एक उम्मीदवार का बैठाना, उतना ही बड़ा उनका विश्वास होता है कि वह विजयी हो सकता है। इसलिए, पकड़ौआ विवाहों का उपयोग राजनीतिक दलों के लिए सिर्फ एक और रणनीतिक कदम है।

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Gaam Ghar News Desk

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