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पटना में परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा छह मार्च

जिलाधिकारी ने समाहरणालय से 48 जागरूकता रथ रवाना कर जनसंख्या स्थिरीकरण हेतु 06 से 20 मार्च तक सघन अभियान चलाने का निर्देश दिया।

Story Highlights
  • 48 जागरूकता रथों को समाहरणालय से किया गया रवाना
  • 06 से 20 मार्च तक चलेगा सेवा पखवाड़ा
  • जिले में कुल 3,150 बंध्याकरण/नसबंदी का लक्ष्य
  • सभी स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क सेवाएँ उपलब्ध

पटना में 06-20 मार्च परिवार नियोजन पखवाड़ा, 48 रथों से जागरूकता, बंध्याकरण-नसबंदी सहित सेवाओं का लक्ष्य 3150 निर्धारित।पटना में 06 मार्च से 20 मार्च 2026 तक “परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा” आयोजित किया जाएगा। जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एस.एम. ने सोमवार को पटना समाहरणालय परिसर से ई-रिक्शा आधारित 48 जागरूकता रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इन रथों के माध्यम से पूरे जिले में जनसंख्या स्थिरीकरण को लेकर सघन जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

जिलाधिकारी ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण बेहतर विकास दर और मानव विकास सूचकांक के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों और स्टेकहोल्डर्स को समन्वय के साथ पखवाड़े का सफल आयोजन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। प्रत्येक रथ सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) सामग्रियों से लैस है तथा आशा फैसिलिटेटर को इसके साथ जोड़ा गया है, जो आमजन को परिवार नियोजन सेवाओं की जानकारी देंगे।

राज्य सरकार के निर्देशानुसार 23 फरवरी से 20 मार्च तक मिशन परिवार विकास अभियान संचालित है। 23 फरवरी से 05 मार्च तक “दम्पति संपर्क सप्ताह” मनाया गया, जबकि 06 से 20 मार्च तक सेवा पखवाड़ा के तहत स्वास्थ्य संस्थानों में विशेष सेवाएँ प्रदान की जाएंगी।

पखवाड़े के दौरान प्रति प्रखंड 120 महिला बंध्याकरण और 10 पुरुष नसबंदी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और अनुमंडल अस्पतालों के लिए महिला बंध्याकरण का लक्ष्य 120 तथा पुरुष नसबंदी का लक्ष्य 40 तय है। जिले में कुल 2,880 महिला बंध्याकरण और 270 पुरुष नसबंदी, यानी कुल 3,150 प्रक्रियाओं का लक्ष्य रखा गया है।

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जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि सभी स्वास्थ्य संस्थानों में कॉपर-टी (आईयूसीडी), गर्भनिरोधक सूई (एमपीए-अंतरा), छाया गोली, माला-एन, कंडोम और आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। प्री-ऑपरेटिव और पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल के लिए समुचित मेडिकल टीम गठित करने, शिविरों में मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराने तथा लाभार्थियों को घर तक एम्बुलेंस सुविधा देने पर विशेष जोर दिया गया।

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उन्होंने पंचायती राज संस्थाओं, आईसीडीएस, जीविका, स्वयंसेवी संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों से अभियान में सहयोग का आह्वान किया। सास-बहू-बेटी सम्मेलन, कार्यशालाओं और सामुदायिक बैठकों के माध्यम से सही उम्र में विवाह, पहले बच्चे में देरी, बच्चों के बीच उचित अंतर और छोटे परिवार के लाभ पर संवाद चलाने का निर्देश दिया गया।

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जिलाधिकारी ने कहा कि प्रत्येक योग्य दम्पति तक पहुँचना और जनसंख्या स्थिरीकरण के लक्ष्य को साकार करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

Gaam Ghar Desk

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