
समस्तीपुर जिले में रमज़ान के पाक महीने में दो नन्ही बच्चियों ने अपनी आस्था और अनुशासन से सभी का दिल जीत लिया। मोहम्मद इरफान की पोती और असलम साहब की नतनी इलमा फातमा और इनायत फातमा ने महज चार वर्ष की उम्र में रमज़ानुल मुबारक का रोज़ा रखकर एक प्रेरक उदाहरण पेश किया।
बताया जाता है कि दोनों बच्चियां मोहम्मद सड्डन की पुत्री हैं। इतनी कम उम्र में रोज़ा रखने के उनके जज़्बे की पूरे परिवार और मोहल्ले में सराहना हो रही है। रोज़े के दौरान इलमा और इनायत ने अपने परिजनों के साथ पांचों वक्त की नमाज अदा की। उन्होंने अल्लाह से कौम और देश की खुशहाली, आपसी भाईचारे और अमन-चैन की दुआ भी मांगी।
परिजनों के अनुसार बच्चियों ने पूरे उत्साह और धैर्य के साथ रोज़ा रखा। घर के बड़े-बुजुर्गों ने उन्हें दुलारते हुए रोज़े की अहमियत समझाई और हौसला बढ़ाया। इस अवसर पर रिश्तेदारों और दोस्तों ने भी दोनों बच्चियों को आशीर्वाद दिया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य और लंबी उम्र की कामना की।
रमज़ान का महीना सब्र, इबादत और नेकी का संदेश देता है। ऐसे में इन नन्हीं रोज़ेदारों का यह प्रयास समाज में सकारात्मक संदेश देने वाला माना जा रहा है। इलमा और इनायत की यह पहल न सिर्फ बच्चों के लिए प्रेरणा है, बल्कि बड़ों को भी अपने धार्मिक कर्तव्यों के प्रति सजग रहने की सीख देती है।




