समस्तीपुर में बैलगाड़ियों पर निकली अनोखी देसी थीम बारात
35 बैलगाड़ियों और 70 बैलों संग इको-फ्रेंडली शादी की अनूठी पहल
समस्तीपुर शहर की सड़कों पर बुधवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने लोगों को पुराने जमाने की याद दिला दी। जहां आमतौर पर शादियों में लग्जरी गाड़ियों का काफिला और डीजे की तेज आवाज सुनाई देती है, वहीं इस बार बैलगाड़ियों की मद्धिम चरमराहट, लोकगीतों की तान और शहनाई की धुन ने माहौल को पारंपरिक रंग में रंग दिया।
मगरदही घाट निवासी प्रदीप सेठ के पुत्र आलोक की शादी 25 फरवरी को रोसड़ा की रहने वाली युवती से तय हुई थी। परिवार ने शादी को खास और पर्यावरण के अनुकूल बनाने का निर्णय लिया। इसके लिए 35 बैलगाड़ियों का इंतजाम किया गया, जिनमें कुल 70 बैल लगाए गए। बैलगाड़ियों को आकर्षक ढंग से सजाया गया था और उन पर गद्दे व सोफे लगाए गए थे, जहां बाराती शाही अंदाज में बैठे नजर आए। दूल्हा सजे हुए घोड़े पर सवार होकर बारात का नेतृत्व कर रहा था।
जैसे ही शाम ढली, बारात स्वर्ग होटल से गजराज पैलेस की ओर रवाना हुई। रास्ते भर लोग इस अनोखी बारात को देखने के लिए जुटते रहे। कई लोगों ने इसे अपने मोबाइल कैमरों में कैद किया। बाजार समिति क्षेत्र में पहुंचते-पहुंचते यह बारात चर्चा का विषय बन चुकी थी।
इस अनूठी पहल के पीछे महेंद्र प्रधान का विचार था, जो पशु प्रेमी हैं और सोनपुर मेले में भी कार्यक्रमों का आयोजन करते रहे हैं। उन्होंने बताया कि आज के दौर में बारातें महंगी गाड़ियों से निकलती हैं, जिससे पेट्रोल-डीजल की खपत और प्रदूषण बढ़ता है। बैलगाड़ी से निकली यह बारात पूरी तरह प्रदूषण मुक्त है और प्राचीन परंपराओं को जीवित रखने का संदेश देती है।
उन्होंने कहा कि करोड़ों की गाड़ियों वाली बारातों की बजाय इस देसी थीम बारात ने लोगों का ज्यादा ध्यान खींचा। अब 35 बैलगाड़ियों पर निकली इस अनोखी बारात की चर्चा पूरे शहर में हो रही है।




