‘डेढ़ इंच ऊपर’ ने दिखाया स्वप्निल और स्मृतिपरक जीवन का द्वंद्व
स्वप्निल और स्मृतिपरक संसार में जीना दिखाता है "डेढ इंच उपर"
पटना : राजधानी की प्रमुख नाट्य संस्था विश्वा, पटना द्वारा आयोजित तीन दिवसीय नाट्य महोत्सव ‘विश्वोत्सव 2025-26’ के अंतर्गत मंगलवार की संध्या साहित्य और रंगमंच का सशक्त संगम देखने को मिला। इमेजिनेशन स्कूल ऑफ ड्रामा एंड फिल्म मेकिंग, कंकड़बाग स्थित परिसर में प्रसिद्ध साहित्यकार निर्मल वर्मा द्वारा लिखित नाटक “डेढ़ इंच ऊपर” का प्रभावशाली मंचन किया गया।
नाटक का निर्देशन राजेश नाथ राम ने किया, जबकि मंच पर प्रस्तुति राजेश राजा ने दी। संध्या 6:30 बजे शुरू हुए इस नाट्य प्रदर्शन में दर्शकों की अच्छी उपस्थिति रही। प्रस्तुति ने दर्शकों को एक ऐसे मानसिक और भावनात्मक संसार में ले जाकर खड़ा कर दिया, जहां वास्तविकता और स्मृतियों के बीच की महीन रेखा धुंधली पड़ जाती है।
“डेढ़ इंच ऊपर” शीर्षक अपने आप में गहरा प्रतीक समेटे हुए है। यह उस सूक्ष्म दूरी को दर्शाता है, जो व्यक्ति और उसके वास्तविक जीवन के बीच आ जाती है। मानो व्यक्ति ज़मीन से “डेढ़ इंच ऊपर” तैर रहा हो—पूरी तरह यथार्थ से जुड़ा नहीं, बल्कि एक स्वप्निल, स्मृतिपरक और आत्ममंथन से भरे संसार में विचरण कर रहा हो। नाटक का मुख्य पात्र अपने अकेलेपन, अस्तित्व और जीवन की अर्थवत्ता को लेकर गहरे प्रश्नों से जूझता है। उसकी मानसिक स्थिति में एक अजीब-सी उदासी, खालीपन और आत्मसंवाद की तीव्रता दिखाई देती है।
मंच पर राजेश राजा ने अपने सशक्त अभिनय से पात्र की अंतर्द्वंद्वपूर्ण मन:स्थिति को जीवंत कर दिया। प्रकाश परिकल्पना राजीव रॉय की रही, जिसने दृश्य संरचना को प्रभावी बनाया। पार्श्व ध्वनि का संयोजन राहुल आर्यन ने किया, जिससे भावनात्मक वातावरण और अधिक गहन हो उठा। रूप सज्जा आदिल रशीद और आदित्य ने संभाली, जबकि वस्त्र विन्यास पंकज कुमार द्वारा किया गया। मंच निर्माण की जिम्मेदारी सुनील जी ने निभाई। पूर्वाभ्यास प्रभारी के रूप में शशांक शेखर और अभिषेक मेहता का योगदान उल्लेखनीय रहा।
पूरी प्रस्तुति ने यह सिद्ध किया कि रंगमंच केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मविश्लेषण और संवेदनशील चिंतन का सशक्त साधन भी है। ‘विश्वोत्सव 2025-26’ के तहत इस नाटक ने दर्शकों को आधुनिक जीवन की जटिलताओं और मानसिक एकाकीपन पर विचार करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के अंत में इमेजिनेशन पटना और कुंदन कुमार के प्रति आभार व्यक्त किया गया। इस सफल आयोजन ने एक बार फिर पटना के रंगमंचीय परिदृश्य में नई ऊर्जा और गंभीर साहित्यिक अभिव्यक्ति की उपस्थिति दर्ज कराई।




