ग्राउंड रिपोर्ट; सुपौल आग हादसा: मां-बेटी जिंदा ज’लीं, चार घर रा’ख
सुपौल में आधी रात आग का तांडव: मां-बेटी जिंदा ज'लीं, चार घर राख — बलवा पुनर्वास से ग्राउंड रिपोर्ट
सुपौल : नगर परिषद क्षेत्र के बलवा पुनर्वास, गजना चौक (वार्ड नंबर 1) में रविवार देर रात करीब 2:30 बजे लगी भीषण आग ने दो जिंदगियां निगल लीं और चार घरों को राख में बदल दिया। इस द’र्दनाक हा’दसे में नीलम देवी और उनकी चार वर्षीय बेटी अंजलि जिं’दा जल गईं। सोमवार सुबह जब धुआं थमा और राख ठंडी हुई, तो पूरे इलाके में मातम पसरा था।
स्थानीय लोगों के मुताबिक आग सबसे पहले प्रमोद पासवान के घर से उठती लपटों के साथ दिखी। तेज हवा और कच्चे-पक्के घरों की सघन बस्ती होने के कारण आग ने देखते ही देखते पड़ोस के तीन से चार घरों को भी अपनी चपेट में ले लिया। रात का सन्नाटा चीख-पुकार में बदल गया। लोग नींद से जागे तो सामने आग का समंदर था। कुछ लोग बाल्टी और मोटर से पानी डालते रहे, तो कुछ बच्चे और बुजुर्गों को सुरक्षित जगह पहुंचाने में जुट गए।
दमकल की टीम सूचना मिलते ही पहुंची, लेकिन तब तक आग ने बड़ा नुकसान कर दिया था। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद लपटों पर काबू पाया गया। आग बुझने के बाद जब मलबे की तलाशी शुरू हुई, तो अंदर से मां-बेटी के ज’ले हुए श’व बरामद हुए। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अंजलि अपनी मां से चिपकी मिली — यह दृश्य देखकर मौजूद लोग सन्न रह गए।
नीलम देवी मूल रूप से सहरसा जिले के बिहार थाना क्षेत्र के आरान बिशनपुर गांव की रहने वाली थीं। वह अपने पिता प्रमोद पासवान के घर कुछ दिनों के लिए आई हुई थीं। हा’दसे की खबर मिलते ही सहरसा से भी परिजन सुपौल पहुंच गए। घर के बाहर रोते-बिलखते परिजनों और सिसकते पड़ोसियों की भीड़ जमा रही।
घटना की सूचना पर सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और श’वों को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेजा। पुलिस ने बताया कि आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक आशंका शॉर्ट सर्किट, चूल्हे की चिंगारी या ज्वलनशील पदार्थ के कारण आग फैलने की है। हालांकि, फॉरेंसिक जांच और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर ही स्पष्ट वजह सामने आएगी।
ग्राउंड पर बातचीत में कई ग्रामीणों ने बताया कि बस्ती में अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। अधिकतर घर टीन-टप्पर और लकड़ी-बांस से बने हैं, जिससे आग तेजी से फैलती है। रात में फायर अलार्म या पानी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से शुरुआती मिनटों में आग पर काबू पाना मुश्किल हो जाता है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसी बस्तियों में नियमित अग्नि सुरक्षा जांच, जागरूकता अभियान और प्राथमिक उपकरण उपलब्ध कराए जाएं।
स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत देने की बात कही है। राजस्व कर्मियों ने क्षति का आकलन शुरू कर दिया है। नगर परिषद की ओर से अस्थायी आश्रय और जरूरी सामान उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी चल रही है।
बलवा पुनर्वास की यह घटना सिर्फ एक परिवार का नहीं, पूरे मोहल्ले का दर्द बन गई है। सुबह होते-होते राख के ढेर, जले हुए बर्तन और टूटे खंभे उस भयावह रात की गवाही दे रहे थे। लोगों के मन में अब भी सवाल है—अगर आग कुछ मिनट पहले दिख जाती, अगर सुरक्षा के बेहतर इंतजाम होते, तो क्या दो जिंदगियां बच सकती थीं?
फिलहाल पुलिस जांच में जुटी है और प्रशासन राहत कार्यों में लगा है। लेकिन बलवा पुनर्वास की इस त्रासदी ने एक बार फिर शहरी बस्तियों में अग्नि सुरक्षा की हकीकत को उजागर कर दिया है।





