मधुबनी, बिहार : बिहार कांग्रेस में अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आ गई है। मधुबनी स्थित कांग्रेस कार्यालय में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब पार्टी कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। हालात इतने बिगड़ गए कि कार्यकर्ताओं के बीच जमकर लात-घूंसे चले और लाठीबाजी तक की नौबत आ गई। हैरानी की बात यह रही कि यह पूरा घटनाक्रम कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम की मौजूदगी में हुआ। मौके पर पार्टी के वरिष्ठ नेता शकील अहमद खान भी उपस्थित थे।
हमारे व्हाट्सएप चैनल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें
जानकारी के अनुसार, कांग्रेस कार्यालय में बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार को लेकर समीक्षा बैठक चल रही थी। इसी दौरान संगठन की स्थिति और चुनावी रणनीति को लेकर कार्यकर्ताओं के बीच कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के कार्यकर्ता एक-दूसरे पर टूट पड़े। कुछ कार्यकर्ताओं ने पार्टी का झंडा हाथ में लेकर ही मारपीट शुरू कर दी, जिससे कार्यालय में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बैठक के दौरान टिकट बंटवारे में कथित अनियमितता को लेकर आरोप-प्रत्यारोप शुरू हुए थे। एक गुट ने आरोप लगाया कि टिकट वितरण में भेदभाव किया गया, जबकि दूसरे गुट ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया। इसी बात को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों गुटों के बीच हाथापाई शुरू हो गई। कुछ देर में लाठीबाजी भी होने लगी, जिससे कई कार्यकर्ताओं को चोटें आने की बात कही जा रही है।
गूगल न्यूज़ पर फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें
वहां मौजूद अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बीच-बचाव कर स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन तब तक हालात बेकाबू हो चुके थे। घटना के बाद कांग्रेस कार्यालय में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। हालांकि, पार्टी की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था। पार्टी ने 61 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन केवल 6 सीटों पर ही जीत हासिल कर सकी। इस हार के बाद से ही पार्टी के भीतर असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने चुनावी रणनीति, संगठन की कमजोरी और टिकट बंटवारे में पक्षपात के आरोप लगाए थे। यहां तक कि कुछ नेताओं ने टिकट के बदले उगाही तक के आरोप भी लगाए थे।
बताया जा रहा है कि पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में पहले भी कई नेताओं को कांग्रेस से निष्कासित किया जा चुका है। मधुबनी की यह घटना साफ संकेत देती है कि बिहार कांग्रेस में गुटबाजी और असंतोष गहराता जा रहा है, जो आगामी चुनावों के लिए पार्टी के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।






