बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी कानून एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है। राजधानी पटना स्थित सचिवालय परिसर के विकास भवन में अधिकारियों के चैम्बर के बाहर शराब की बोतल मिलने से हड़कंप मच गया। यह मामला सामने आते ही विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला शुरू कर दिया है।
जानकारी के अनुसार विकास भवन के गेट नंबर 6 के पास शराब का एक टेट्रा पैक मिलने से कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। सरकारी परिसर में शराब मिलने की घटना को लेकर कोई अधिकारी खुलकर कुछ बोलने को तैयार नहीं है। इस घटना ने राज्य में 10 वर्षों से लागू शराबबंदी कानून की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
राष्ट्रीय जनता दल के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा कि बिहार नाम का ड्राई स्टेट है, लेकिन शराब अब सचिवालय तक पहुंच चुकी है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि विकास भवन में ही मद्य निषेध विभाग का कार्यालय है और वहीं शराब मिलना बताता है कि कानून की जमीनी स्थिति क्या है।
शक्ति सिंह यादव ने कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी विधानसभा परिसर में शराब मिलने का मामला सामने आ चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में मांग के अनुसार शराब हर जगह उपलब्ध है और इसके पीछे प्रशासनिक लापरवाही तथा अवैध उगाही का तंत्र जिम्मेदार है।
उन्होंने शराबबंदी कानून को बिहार के लिए अभिशाप बताते हुए कहा कि इस नीति से अवैध नशे का कारोबार बढ़ा है और युवा पीढ़ी सूखे नशे की चपेट में आ रही है। विपक्ष ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।




