बिहार की राजनीति में इन दिनों नेतृत्व परिवर्तन को लेकर हलचल तेज हो गई है। नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव जीतने के बाद यह चर्चा और जोर पकड़ने लगी है कि राज्य में जल्द ही नया मुख्यमंत्री देखने को मिल सकता है।
30 मार्च क्यों है अहम
सूत्रों के अनुसार 30 मार्च की तारीख इस पूरे घटनाक्रम में टर्निंग प्वाइंट मानी जा रही है। नियमों के तहत नीतीश कुमार को राज्यसभा सदस्य बनने के लिए इससे पहले बिहार विधान परिषद (एमएलसी) की सदस्यता छोड़नी होगी। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो उनकी राज्यसभा सदस्यता प्रभावित हो सकती है।
दो चरणों में इस्तीफे की चर्चा
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि नीतीश कुमार एक साथ सभी पद नहीं छोड़ेंगे, बल्कि दो चरणों में इस्तीफा देंगे। पहले वे एमएलसी पद से इस्तीफा देंगे और उसके बाद मुख्यमंत्री पद से हटेंगे।
अप्रैल में हो सकता है दूसरा इस्तीफा
जानकारी के मुताबिक, राज्यसभा की औपचारिक सदस्यता 10 अप्रैल के आसपास शुरू होगी। ऐसे में मुख्यमंत्री पद से उनका इस्तीफा अप्रैल के दूसरे सप्ताह में आ सकता है। इसके बाद बिहार को नया मुख्यमंत्री मिलने की संभावना है।
बीजेपी से सीएम बनने की अटकलें
नीतीश कुमार के केंद्र की राजनीति में जाने की संभावना के बीच यह भी चर्चा तेज है कि अगला मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी का हो सकता है। इस रेस में सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है।
अन्य नेताओं के नाम भी चर्चा में
सम्राट चौधरी के अलावा नित्यानंद राय, विजय सिन्हा, दिलीप जायसवाल और मंगल पांडेय जैसे नेताओं के नाम भी संभावित उम्मीदवारों में शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि एनडीए की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है।
समृद्धि यात्रा के बाद होगा फैसला
फिलहाल नीतीश कुमार राज्य में ‘समृद्धि यात्रा’ पर हैं, जिसका समापन 26 मार्च को पटना में होना है। माना जा रहा है कि इस यात्रा के बाद ही एनडीए के घटक दल नए मुख्यमंत्री को लेकर औपचारिक चर्चा शुरू करेंगे।
जनता और सियासत की नजरें टिकी
आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। 30 मार्च के बाद घटनाक्रम तेजी से बदलने की संभावना है, जिस पर पूरे राज्य की नजरें टिकी हुई हैं।





