
पटना : बिहार की राजनीति में इन दिनों एक नया नाम चर्चा में है—Nishant Kumar। मुख्यमंत्री Nitish Kumar के बेटे निशांत कुमार ने हाल ही में औपचारिक रूप से Janata Dal United की सदस्यता ली है। उनके इस कदम के बाद राज्य की राजनीति में नई संभावनाओं और अटकलों का दौर शुरू हो गया है।
जदयू में शामिल होने के एक दिन बाद निशांत कुमार पटना के कंकड़बाग स्थित मंजू सिन्हा पार्क पहुंचे। यहां उन्होंने अपनी दिवंगत मां Manju Sinha की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान वे काफी भावुक नजर आए और अपनी मां को याद करते हुए कहा कि उनकी कमी हमेशा महसूस होती है।
मां की याद में भावुक हुए निशांत
मीडिया से बातचीत के दौरान निशांत कुमार ने कहा कि वे अपनी मां को श्रद्धांजलि देने आए हैं। उन्होंने कहा कि मां की बहुत याद आती है और उनका आशीर्वाद हमेशा उनके साथ बना रहे, यही उनकी कामना है।
निशांत ने कहा कि अगर उनकी मां आज जीवित होतीं तो यह पल और भी खास होता। उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि मां का स्नेह और आशीर्वाद जीवन में बहुत महत्वपूर्ण होता है और वही उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
पूरे बिहार का दौरा करने की योजना
मीडिया से बातचीत के दौरान निशांत कुमार ने यह भी संकेत दिया कि वे बिहार के लोगों से सीधे जुड़ने की कोशिश करेंगे। उन्होंने बताया कि वे राज्य के सभी 38 जिलों का दौरा करने की योजना बना रहे हैं।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अभी इस योजना पर विचार चल रहा है और जल्द ही इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। उनका मानना है कि जनता से सीधे संवाद के जरिए ही राज्य की वास्तविक समस्याओं को समझा जा सकता है।
मुख्यमंत्री बनने के सवाल पर चुप्पी
निशांत कुमार के राजनीति में आने के बाद से यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या वे भविष्य में बिहार की राजनीति में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। कई राजनीतिक कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में देखने की इच्छा भी जाहिर की है।
लेकिन जब पत्रकारों ने उनसे इस बारे में सवाल पूछा कि क्या वे मुख्यमंत्री बनने की संभावना देखते हैं, तो उन्होंने इस सवाल का सीधा जवाब देने से परहेज किया। निशांत इस सवाल को टालते हुए आगे बढ़ गए और किसी तरह की टिप्पणी करने से बचते नजर आए।
उन्होंने केवल इतना कहा कि वे पार्टी के लिए पूरी मेहनत और ईमानदारी से काम करना चाहते हैं।
पिता के काम को आगे बढ़ाने की बात
निशांत कुमार ने कहा कि उनके पिता Nitish Kumar ने पिछले लगभग दो दशकों में बिहार के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं।
उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश रहेगी कि वे उन कार्यों को आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभा सकें। उनके अनुसार राजनीति में आने का उद्देश्य सत्ता नहीं बल्कि सेवा और विकास होना चाहिए।
राजनीति में एंट्री पर सियासी प्रतिक्रियाएं
निशांत कुमार के राजनीति में आने के बाद राज्य की राजनीति में प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया है। बिहार के उपमुख्यमंत्री Samrat Choudhary ने कहा कि निशांत का राजनीति में स्वागत है और यह जदयू का आंतरिक निर्णय है।
वहीं जदयू के वरिष्ठ नेता Vijay Kumar Chaudhary ने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ताओं की इच्छा और समर्थन के कारण ही निशांत कुमार ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी का नेतृत्व अब भी नीतीश कुमार के हाथों में ही रहेगा।
दूसरी ओर भाजपा नेता Sanjay Paswan ने कहा कि किसी भी पार्टी में नेतृत्व से जुड़े फैसले सामूहिक रूप से लिए जाते हैं और समय आने पर बैठक में इस पर निर्णय होगा।
पिता की तरह किया अभिवादन
जदयू में शामिल होने के कार्यक्रम के दौरान निशांत कुमार ने अपने पिता की तरह हाथ जोड़कर पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं का अभिवादन किया। वे सफेद कुर्ता और साधारण चप्पल पहनकर कार्यक्रम में पहुंचे थे, जिससे उनकी सादगी भी चर्चा का विषय बनी।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने जनता से अपील की कि वे उनके पिता पर भरोसा बनाए रखें और राज्य के विकास के लिए सरकार का सहयोग करें।
निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री को बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि वे राजनीति में किस तरह की भूमिका निभाते हैं और राज्य की सियासत में उनका प्रभाव कितना बढ़ता है।





