
बिहार की राजनीति में पिछले दो दशकों से अधिक समय तक प्रभावी भूमिका निभाने वाले Nitish Kumar अब राज्यसभा के लिए नामांकन के साथ एक नए राजनीतिक अध्याय की ओर बढ़ते दिख रहे हैं। इस दौरान उनके नेतृत्व में बिहार में कई ऐसी योजनाएं और नीतियां लागू हुईं, जिनका उद्देश्य विकास, सामाजिक सुधार और प्रशासनिक पारदर्शिता को मजबूत करना रहा।
नीतीश कुमार के कार्यकाल में सबसे अधिक चर्चा महिला सशक्तिकरण और बुनियादी ढांचे के विकास की रही। पंचायत और नगर निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय देशभर में एक उदाहरण माना गया। इसके अलावा लड़कियों की पढ़ाई को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री बालिका साइकिल और पोशाक योजना शुरू की गई, जिससे स्कूलों में छात्राओं की उपस्थिति बढ़ी।
महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए जीविका स्वयं सहायता समूहों का विस्तार किया गया। वहीं सामाजिक मांग को देखते हुए बिहार में शराबबंदी लागू की गई, जो राज्य की राजनीति में एक बड़ा निर्णय माना गया।
शिक्षा के क्षेत्र में भी कई नए संस्थानों की स्थापना की गई। इनमें चाणक्य लॉ यूनिवर्सिटी, आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय सहित कई उच्च शिक्षण संस्थान शामिल हैं। इसके साथ ही युवाओं की पढ़ाई के लिए स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना की शुरुआत की गई, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों को पढ़ाई में मदद मिली।
बुनियादी ढांचे के विकास पर भी विशेष जोर दिया गया। सड़कों के विस्तार और पुलों के निर्माण से राज्य के कई दूरदराज इलाके मुख्य शहरों से जुड़े। गंगा और कोसी नदियों पर बने पुलों ने आवागमन को आसान बनाया। बिजली के क्षेत्र में भी बड़े बदलाव हुए और हर घर तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य हासिल किया गया।
ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर नल का जल और पक्की गली-नली योजना के जरिए आधारभूत सुविधाओं को मजबूत किया गया। वहीं पर्यावरण संरक्षण के लिए जल-जीवन-हरियाली अभियान शुरू किया गया, जिसका उद्देश्य जल संरक्षण और हरियाली बढ़ाना था।
पर्यटन के क्षेत्र में भी कई पहलें हुईं। राजगीर में ग्लास ब्रिज, जंगल सफारी और नेचर सफारी का निर्माण कराया गया, जबकि पटना में गंगा पथ और इको पार्क जैसी परियोजनाओं ने शहर के विकास को नई पहचान दी।
इसके अलावा प्रशासनिक सुधार के तहत लोक सेवाओं का अधिकार कानून लागू किया गया, जिससे लोगों को सरकारी सेवाएं तय समय में मिल सकें।
इन सब पहलों के कारण बिहार में विकास और प्रशासनिक सुधारों की नई चर्चा शुरू हुई। अब जब नीतीश कुमार राज्यसभा की ओर कदम बढ़ा रहे हैं, तो उनके दो दशक के कार्यकाल की उपलब्धियां बिहार की राजनीति में लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रहेंगी।





