
पटना की सियासत में इन दिनों सरकारी आवास को लेकर हलचल रही। बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष के तौर पर राबड़ी देवी को 39, हार्डिंग रोड स्थित नया सरकारी बंगला आवंटित किया गया। भवन निर्माण विभाग की ओर से आदेश जारी होते ही यह चर्चा तेज हो गई कि लंबे समय से परिवार के कब्जे में रहा 10 सर्कुलर रोड अब खाली कराया जाएगा। लेकिन करीब 90 दिन बीतने के बाद भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
10 सर्कुलर रोड का राजनीतिक महत्व
10 सर्कुलर रोड केवल एक सरकारी आवास नहीं, बल्कि लालू प्रसाद यादव परिवार का राजनीतिक केंद्र रहा है। राष्ट्रीय जनता दल के कई अहम फैसले यहीं से लिए गए। पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए यह पता एक प्रतीक की तरह है। ऐसे में इसे खाली कराने की चर्चा ने राजनीतिक रंग ले लिया। विपक्ष ने इसे दबाव की राजनीति करार दिया, जबकि सरकार की ओर से कोई औपचारिक बेदखली नोटिस जारी नहीं हुआ।
भाजपा मंत्री की पहल और विभागीय हलचल
सूत्रों के अनुसार, नई राजनीतिक परिस्थितियों में भाजपा के एक वरिष्ठ मंत्री ने इस आवास को खाली कराने की पहल की थी। बताया जाता है कि संबंधित अधिकारियों को इस दिशा में मौखिक निर्देश भी दिए गए। हालांकि भवन निर्माण विभाग जदयू कोटे के मंत्री के पास है, जो मुख्यमंत्री के करीबी माने जाते हैं। विभाग ने आवंटन आदेश तो जारी कर दिया, लेकिन 10 सर्कुलर रोड को खाली कराने की ठोस प्रक्रिया शुरू नहीं की गई। न ही इस आवास को किसी अन्य व्यक्ति के नाम आवंटित किया गया।
यहीं से संकेत मिलने लगे कि मामला केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक संतुलन से जुड़ा है।
मीडिया रिपोर्ट के बाद सक्रिय हुए मुख्यमंत्री
मामले ने तब नया मोड़ लिया जब मीडिया में यह खबर प्रमुखता से चली। बताया जाता है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को शुरुआत में पूरी जानकारी नहीं थी। खबर सामने आने के बाद उन्होंने अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने फिलहाल इस विषय को ठंडे बस्ते में डालने का संकेत दिया और विभागीय स्तर पर अनावश्यक जल्दबाजी पर नाराजगी भी जताई।
इसके बाद से न तो बेदखली की प्रक्रिया आगे बढ़ी और न ही इस पर सार्वजनिक बयानबाजी हुई। सियासी गलियारों में इसे जदयू-भाजपा संतुलन की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
39 हार्डिंग रोड: सुविधाओं से लैस नया आवास
राबड़ी देवी को आवंटित 39, हार्डिंग रोड का बंगला दो मंजिला है। इसमें तीन-तीन बड़े बेडरूम, ड्राइंग-डाइनिंग एरिया, विशाल हॉल और स्टाफ क्वार्टर की सुविधा है। सुरक्षा के लिए अलग से व्यवस्था और बड़ा गार्डन भी है। मरम्मत और रंग-रोगन का कार्य लगभग पूरा हो चुका है।
प्रशासनिक दृष्टि से यह आवास नेता प्रतिपक्ष की श्रेणी के अनुरूप है। लेकिन राजनीतिक और पारिवारिक परिस्थितियां इसे तुरंत स्वीकार करने में बाधा बनती दिख रही हैं।
शिफ्टिंग क्यों मुश्किल?
जानकारों का मानना है कि नया बंगला दंपति के लिए पर्याप्त है, लेकिन यदि पूरा परिवार साथ रहता है तो जगह कम पड़ सकती है। इसके अलावा 10 सर्कुलर रोड छोड़ना केवल आवास बदलना नहीं, बल्कि एक राजनीतिक प्रतीक से दूरी बनाना भी माना जाएगा। यही वजह है कि फिलहाल शिफ्टिंग की संभावना कम नजर आ रही है।
नियम बनाम राजनीति
सरकारी नियमों के अनुसार नेता प्रतिपक्ष को निर्धारित श्रेणी का आवास मिलता है। आवंटन क्षेत्रवार तय होता है और बदलाव प्रशासनिक प्रक्रिया से होता है। हालांकि व्यवहार में राजनीतिक सहमति और परिस्थितियां अहम भूमिका निभाती हैं।
फिलहाल संकेत यही हैं कि 10 सर्कुलर रोड खाली कराने की योजना ठंडे बस्ते में है। बिहार की राजनीति में आवास का यह मुद्दा सत्ता संतुलन और प्रतीकात्मक राजनीति का उदाहरण बन गया है।





