बिहार में ग्राम पंचायतों के वार्ड सदस्यों को वित्तीय अधिकार देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा सकता है। राज्य सरकार वार्ड सदस्यों को मनरेगा और अन्य वित्तीय मदों के तहत योजनाओं के चयन और राशि खर्च करने का अधिकार देने पर विचार कर रही है। इस संबंध में केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने की तैयारी है। यह जानकारी ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने सोमवार को विधान परिषद में दी।
एमएलसी सौरभ कुमार के प्रश्न के उत्तर में मंत्री ने बताया कि वर्तमान में मनरेगा के तहत मुखिया को सालाना 10 लाख रुपये तक खर्च करने का अधिकार है। हालांकि, वार्ड सदस्य चुने हुए जनप्रतिनिधि होने के बावजूद उनके पास सीधे तौर पर राशि खर्च करने का अधिकार नहीं है। इसी मुद्दे पर सदन में लगभग 30 मिनट तक व्यापक चर्चा हुई, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के सदस्यों ने वार्ड सदस्यों को भी वित्तीय अधिकार देने की मांग उठाई।
सदस्य सच्चिदानंद राय ने कहा कि कई बार मुखिया उन्हीं वार्डों में अधिक राशि खर्च करते हैं, जहां उन्हें ज्यादा वोट मिले होते हैं। ऐसे में अन्य वार्ड विकास से वंचित रह जाते हैं। पूर्व मंत्री संतोष सिंह ने सुझाव दिया कि मनरेगा के अलावा 15वें वित्त आयोग और छठे राज्य वित्त आयोग की राशि खर्च करने का अधिकार भी वार्ड सदस्यों को दिया जाना चाहिए। वहीं दिनेश सिंह ने कहा कि जब वार्ड सदस्य जनता द्वारा चुने जाते हैं, तो उन्हें अधिकारों से वंचित रखना उचित नहीं है।
इस मुद्दे पर पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि वार्ड सदस्यों को पंचायत स्तर पर आयोजित बैठकों में सक्रिय भागीदारी करनी चाहिए और अपने वार्ड की योजनाओं पर सहमति बनानी चाहिए, ताकि सभी क्षेत्रों में संतुलित विकास हो सके।
इसी दौरान विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि विभिन्न विकास योजनाओं के शिलापट्ट पर विधायक से पहले संबंधित क्षेत्र के विधान पार्षद का नाम होना चाहिए। साथ ही कार्यक्रमों में पार्षदों को अनिवार्य रूप से आमंत्रित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस संबंध में राज्य सरकार का आदेश पहले से मौजूद है, लेकिन इसका पालन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।
ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी ने जवाब देते हुए कहा कि जिलाधिकारियों को निर्देश देकर कई शिलापट्टों में सुधार कराया गया है। यदि कहीं त्रुटि रह गई है, तो उसे भी दुरुस्त किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो वार्ड स्तर पर विकास कार्यों को गति मिल सकती है और पंचायतों में निर्णय प्रक्रिया अधिक विकेंद्रीकृत और पारदर्शी हो सकती है।




