पटना : बिहार में राशन कार्ड से जुड़े करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की तैयारी है। राज्य सरकार राशन कार्ड में परिवार के सदस्यों का नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को पूरी तरह सरल, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में काम कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने के बाद जन्म प्रमाणपत्र जारी होते ही नवजात का नाम राशन कार्ड में जोड़ने तथा मृ’त्यु प्रमाणपत्र जारी होने पर संबंधित सदस्य का नाम स्वतः हटाने की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। इसका उद्देश्य लोगों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत देना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के रिकॉर्ड को अद्यतन रखना है।’
नई व्यवस्था के तहत जन्म एवं मृ’त्यु पंजीकरण प्रणाली को राशन कार्ड प्रबंधन प्रणाली से जोड़ने की योजना है। इससे दोनों विभागों के बीच डिजिटल डेटा का आदान-प्रदान होगा और रिकॉर्ड स्वतः अपडेट हो सकेगा। इससे फर्जी, डुप्लीकेट और मृत व्यक्तियों के नाम लंबे समय तक राशन कार्ड में बने रहने जैसी समस्याओं पर भी अंकुश लगेगा।
वर्तमान में परिवार में नया सदस्य जुड़ने, विवाह के बाद नाम जोड़ने या किसी सदस्य की मृ’त्यु होने पर राशन कार्ड में संशोधन के लिए अलग से आवेदन करना पड़ता है। कई मामलों में आवश्यक दस्तावेज जमा करने, सत्यापन और अनुमोदन की प्रक्रिया में समय लगता है। नई प्रणाली लागू होने पर यह प्रक्रिया काफी हद तक स्वतः संचालित हो जाएगी, जिससे लाभार्थियों को बड़ी सुविधा मिलेगी।
राज्य सरकार पहले से ही राशन कार्ड रिकॉर्ड को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए ई-केवाईसी, आधार सत्यापन और अपात्र लाभार्थियों की पहचान का अभियान चला रही है। इसी क्रम में जन्म और मृ’त्यु पंजीकरण को राशन कार्ड प्रणाली से जोड़ने की पहल को डिजिटल प्रशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यवस्था से सही पात्र परिवारों तक खाद्यान्न का लाभ समय पर पहुंचेगा। नवजात बच्चों का नाम जल्द जुड़ने से उन्हें भी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ मिल सकेगा, जबकि मृत व्यक्तियों के नाम स्वतः हटने से रिकॉर्ड अधिक सटीक रहेगा। इससे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी
फिलहाल बिहार में राशन कार्ड में नाम जोड़ने, हटाने या अन्य सुधार के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यम उपलब्ध हैं। लाभार्थी आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन कर सकते हैं। नई डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद इन प्रक्रियाओं में मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और समय की भी बचत होगी।




