दरभंगा : मिथिलायन, शिम्मर फाउंडेशन एवं लक्ष्मीश्वर पब्लिक लाइब्रेरी, दरभंगा के संयुक्त तत्वावधान में वरिष्ठ साहित्यकार एवं अवकाशप्राप्त आईआरएस अधिकारी श्री कामेश्वर चौधरी की आत्मकथा ‘अपन-अपन दीप : जीवन यात्रा’ का भव्य लोकार्पण समारोह लक्ष्मीश्वर पब्लिक लाइब्रेरी के सभागार में आयोजित हुआ। कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन से हुआ, जबकि सुप्रसिद्ध गायिका डॉ. सुषमा झा ने भगवती वंदना एवं स्वागत गीत प्रस्तुत किया।
शिम्मर फाउंडेशन के संस्थापक सुमित सुमन ने अतिथियों का स्वागत करते हुए आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। समारोह की अध्यक्षता करते हुए मैथिली के वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. भीमनाथ झा ने कहा कि “आत्मकथा में केवल तारीखें नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन की समग्रता और आत्मा से निकली अनुभूतियों का सच्चा दस्तावेज़ होता है।” उन्होंने कहा कि किसी भी आत्मकथा की सबसे बड़ी शक्ति उसकी प्रामाणिकता होती है और यह पुस्तक उस कसौटी पर खरी उतरती है।
मैथिली के विद्वान डॉ. योगानन्द झा ने पुस्तक की विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत करते हुए इसे संघर्ष, शिक्षा, उपलब्धियों और नैतिक मूल्यों से परिपूर्ण प्रेरणादायी कृति बताया। प्रो. प्रभाष चन्द्र मिश्र ने पुस्तक की भाषा-शैली, तारतम्यता एवं आत्मपरीक्षण की भावना की सराहना करते हुए कहा कि यह पुस्तक पाठकों को एक ही बैठक में पढ़ने के लिए प्रेरित करती है। वहीं प्रो. अशोक कुमार मेहता ने कहा कि आत्मकथा केवल व्यक्ति का नहीं, बल्कि उसके समय के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक परिवेश का भी जीवंत दस्तावेज़ होती है।
लेखक श्री कामेश्वर चौधरी ने अपने जीवन-संघर्ष, प्रशासनिक अनुभव, साहित्यिक यात्रा तथा सामाजिक प्रतिबद्धताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यकार, शिक्षाविद्, समाजसेवी, पत्रकार, कलाकार, शोधार्थी एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। अंत में लक्ष्मीश्वर पब्लिक लाइब्रेरी के सचिव तरुण कुमार मिश्र ने सभी अतिथियों एवं सहयोगियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।



