समस्तीपुर : नगर निगम क्षेत्र में अनियोजित और नियमविहीन भवन निर्माण पर अब सख्त लगाम लगने जा रही है। समस्तीपुर नगर निगम ने स्पष्ट कर दिया है कि निगम से नक्शा स्वीकृत कराए बिना न तो कोई भवन निर्माण किया जा सकेगा और न ही इसके लिए किसी भी बैंक से ऋण मिलेगा। इस फैसले के बाद शहर में वर्षों से चल रही “पहले लोन, बाद में निर्माण” की परंपरा पर पूर्ण विराम लग जाएगा।
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नगर आयुक्त ज्ञान प्रकाश द्वारा सभी सरकारी और निजी बैंकों को जारी निर्देश में कहा गया है कि नगर निगम क्षेत्र में भवन निर्माण से पहले बिहार बिल्डिंग बाय-लॉज 2014 और संशोधित 2022 के तहत नक्शा स्वीकृति अनिवार्य है। जब तक निगम द्वारा नक्शा पास नहीं किया जाएगा, तब तक होम लोन या किसी भी तरह का निर्माण ऋण स्वीकृत नहीं किया जाएगा।
अब तक स्थिति यह थी कि कई बैंक बिना नक्शा की विधिवत जांच किए ही ऋण मंजूर कर देते थे। इसके चलते शहर में नालों के ऊपर निर्माण, सड़कों पर सीढ़ियां निकालना और तंग गलियों में बहुमंजिला इमारतें खड़ी करने जैसी अव्यवस्थाएं बढ़ गई थीं। इससे ट्रैफिक जाम, जलनिकासी बाधित होने और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ने के साथ-साथ शहर का नियोजित विकास भी प्रभावित हो रहा था।
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नगर निगम के इस निर्णय से यह स्पष्ट संदेश गया है कि अब नियमों की अनदेखी कर भवन खड़ा करना आसान नहीं होगा। पहले नक्शा पास कराना होगा, मानकों का पालन करना होगा और तभी निर्माण संभव हो पाएगा।
सूत्रों के अनुसार इस आदेश से उन बड़े बिल्डरों और प्रभावशाली लोगों पर भी शिकंजा कसेगा, जो अब तक होटल, शॉपिंग मॉल और कॉम्प्लेक्स जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए नियमों को दरकिनार कर आसानी से बैंक ऋण हासिल कर लेते थे। प्रशासन का मानना है कि इस कदम से समस्तीपुर शहर का विकास अधिक सुव्यवस्थित और सुरक्षित दिशा में आगे बढ़ेगा।





