पटना : नीट प्रश्नपत्र लीक मामले और छात्रों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर राजधानी पटना में हुए विरोध-प्रदर्शनों का व्यापक असर शहर के जनजीवन और कारोबार पर देखने को मिला। लगातार दो दिनों तक चले प्रदर्शन, जुलूस और सड़क जाम के कारण राजधानी के प्रमुख बाजारों में व्यापारिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित रहीं। व्यापारिक संगठनों के अनुसार, इन दो दिनों में करीब 15 करोड़ रुपये के कारोबार का नुकसान हुआ है। वहीं हजारों लोगों को भीषण जाम, यातायात अव्यवस्था और आवाजाही में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
बुधवार और गुरुवार को प्रदर्शनकारियों द्वारा शहर के विभिन्न इलाकों में विरोध-प्रदर्शन किए गए। इसका सबसे अधिक असर अशोक राजपथ, डाकबंगला चौराहा, फ्रेजर रोड, एग्जीबिशन रोड, गांधी मैदान और आसपास के व्यावसायिक क्षेत्रों पर पड़ा। कई स्थानों पर लंबा जाम लगने से ग्राहक बाजार तक नहीं पहुंच सके। दुकानदारों का कहना है कि दिनभर ग्राहकों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम रही, जिससे खुदरा और थोक दोनों प्रकार के कारोबार प्रभावित हुए।
व्यापारियों के अनुसार, जाम और प्रदर्शन के कारण कई दुकानों को समय से पहले बंद करना पड़ा। शहर के बाहर से खरीदारी के लिए आने वाले लोग भी ट्रैफिक की समस्या के कारण बाजार आने से बचते रहे। इसका असर केवल बिक्री पर ही नहीं, बल्कि माल की आपूर्ति, परिवहन और समय पर डिलीवरी पर भी पड़ा। कई व्यापारियों को तय समय पर सामान नहीं मिल सका, जिससे व्यावसायिक गतिविधियां बाधित रहीं।
बिहार राज्य व्यवसायिक संघ के अध्यक्ष अजय गुप्ता ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करना सभी का अधिकार है, लेकिन ऐसी व्यवस्था भी होनी चाहिए जिससे आम नागरिकों, मरीजों, छात्रों और व्यापारियों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि भविष्य में विरोध-प्रदर्शनों के दौरान बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन और वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
एग्जीबिशन रोड के कारोबारी आशीष रोहतगी ने बताया कि सड़क जाम के कारण ग्राहकों की संख्या में भारी गिरावट आई। वहीं डाकबंगला चौराहा के कारोबारी उमेश कुमार ने कहा कि यह क्षेत्र राजधानी का प्रमुख व्यापारिक केंद्र है। जब यहां यातायात बाधित होता है तो इसका सीधा असर आसपास के सभी बाजारों पर पड़ता है। लोग जाम के डर से बाजार आने से बचते हैं, जिससे व्यापार प्रभावित होता है।
बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (बीआईए) के महासचिव अमरनाथ जायसवाल ने कहा कि सड़क जाम और अवरुद्ध यातायात का असर केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उद्योग, परिवहन और आपूर्ति श्रृंखला पर भी पड़ता है। खेतान मार्केट एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने भी कहा कि लगातार बाधित यातायात के कारण बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही कम रही और कारोबारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
व्यापारिक संगठनों ने सरकार और प्रशासन से आग्रह किया है कि विरोध-प्रदर्शनों के दौरान ऐसी प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए जिससे लोकतांत्रिक अधिकार भी सुरक्षित रहें और आम जनता तथा व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित न हों। उनका मानना है कि राजधानी जैसे बड़े शहर में यातायात प्रबंधन को और मजबूत बनाना समय की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की परिस्थितियों में व्यापार और जनजीवन पर न्यूनतम प्रभाव पड़े।




