मधुबनी में कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार तथा जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भामती वाचस्पति महोत्सव–2026 का शुभारंभ शुक्रवार को एक गरिमामय परिचर्चा सत्र के साथ हुआ। यह आयोजन मिथिला की समृद्ध दार्शनिक परंपरा, सांस्कृतिक चेतना और ज्ञान-साधना की गौरवशाली विरासत को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।
कार्यक्रम में विद्वानों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों, संस्कृति प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। उद्घाटन सत्र में उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकांत पाण्डेय, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी नीतीश कुमार, भामती वाचस्पति समिति के अध्यक्ष रत्नेश्वर झा सहित कई प्रतिष्ठित विद्वान मौजूद रहे।
परिचर्चा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि मधुबनी केवल कला और लोकसंस्कृति के लिए ही नहीं, बल्कि दर्शन, तर्कशास्त्र और वैचारिक परंपरा के लिए भी विश्व स्तर पर प्रसिद्ध रहा है। वाचस्पति मिश्र और भामती जैसी विभूतियां मिथिला की उसी महान बौद्धिक परंपरा का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिसने भारतीय दर्शन और ज्ञान परंपरा को नई दिशा प्रदान की।
वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि इस तरह के महोत्सव नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं। इससे न केवल स्थानीय गौरव को मजबूती मिलती है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान राष्ट्रीय स्तर पर भी स्थापित होती है।
इस अवसर पर महोत्सव से संबंधित महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट्री “सर्वतन्त्र स्वतंत्र : पंडित वाचस्पति मिश्र” का विधिवत विमोचन किया गया। यह डॉक्यूमेंट्री भामती-वाचस्पति परंपरा और मिथिला की ज्ञानधारा को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करती है। इसके साथ ही स्मारिका “वाचस्पति दर्पण–2026” का भी लोकार्पण किया गया, जिसमें भामती-वाचस्पति परंपरा और क्षेत्रीय सांस्कृतिक विरासत से जुड़े कई शोधपरक लेख शामिल हैं।
आयोजकों ने बताया कि इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य मिथिला की सांस्कृतिक और शास्त्रीय परंपराओं को पुनर्प्रतिष्ठित करना तथा समाज में साहित्य, संस्कृति और दर्शन के प्रति व्यापक रुचि को बढ़ावा देना है। ऐसे आयोजन मधुबनी को एक सशक्त सांस्कृतिक और बौद्धिक केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
महोत्सव के अंतर्गत शुक्रवार की शाम 6 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान लोकसंगीत, पारंपरिक नृत्य और विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से मिथिला की जीवंत सांस्कृतिक परंपरा का आकर्षक प्रदर्शन किया जाएगा।
आयोजकों ने जिले के नागरिकों, विद्यार्थियों, कलाकारों और संस्कृति प्रेमियों से बड़ी संख्या में उपस्थित होकर इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बनने की अपील की है। यह महोत्सव मधुबनी के सांस्कृतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है, जो अतीत की गौरवशाली परंपरा को वर्तमान और भविष्य से जोड़ने का प्रयास है।





