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उमेश कुशवाहा तीसरी बार जेडीयू बिहार अध्यक्ष’ ‘लव-कुश’ समीकरण…

महनार विधायक उमेश सिंह कुशवाहा निर्विरोध तीसरी बार जेडीयू बिहार अध्यक्ष चुने गए, ‘लव-कुश’ सामाजिक समीकरण मजबूत कर संगठन विस्तार की रणनीति तेज

बिहार की राजनीति में जनता दल-यूनाइटेड (जेडीयू) के संगठनात्मक चुनाव के तहत बड़ा फैसला सामने आया है। वैशाली जिले के महनार से विधायक उमेश सिंह कुशवाहा को लगातार तीसरी बार पार्टी की बिहार इकाई का अध्यक्ष चुना गया है। शुक्रवार को उन्होंने इस पद के लिए अपना नामांकन दाखिल किया और किसी अन्य उम्मीदवार के मैदान में नहीं आने के कारण वे निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए।

पार्टी की ओर से उनके चुनाव की औपचारिक घोषणा शाम चार बजे की गई। नामांकन प्रक्रिया के दौरान जेडीयू के कई वरिष्ठ नेता और मंत्री मौजूद रहे। राज्य चुनाव अधिकारियों अशोक कुमार ‘मुन्ना’ और परमहंस कुमार के समक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने अपना नामांकन दाखिल किया। इस मौके पर पार्टी के कई प्रमुख नेता और कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे।

उनके प्रस्तावकों में बिहार सरकार की मंत्री लेशी सिंह, पूर्व मंत्री एवं विधायक रत्नेश सदा, पूर्व मंत्री एवं विधायक शीला मंडल और पूनम सिन्हा शामिल थे। इसके अलावा राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर, मंत्री श्रवण कुमार, बिहार विधान परिषद के मुख्य सचेतक संजय कुमार सिंह सहित जेडीयू के कई अन्य नेता भी इस कार्यक्रम में मौजूद रहे।

उमेश सिंह कुशवाहा पिछले लगभग पांच वर्षों से बिहार में जेडीयू संगठन का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्हें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिना जाता है। वर्ष 2021 में उन्हें वशिष्ठ नारायण सिंह के स्थान पर जेडीयू का बिहार प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। तब से लेकर अब तक वे लगातार संगठन को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जेडीयू का पारंपरिक सामाजिक आधार ‘लव-कुश’ समीकरण पर टिका रहा है। इसमें मुख्य रूप से कुर्मी और कोइरी समुदाय शामिल हैं। कोइरी समाज से आने वाले उमेश सिंह कुशवाहा को पार्टी में ‘कुश’ पक्ष को मजबूत करने वाले नेता के रूप में देखा जाता है। यही वजह है कि पार्टी नेतृत्व ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया है।

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गौरतलब है कि कोइरी समाज के प्रमुख नेता रहे उपेंद्र कुशवाहा के जेडीयू छोड़ने के बाद पार्टी के सामने इस सामाजिक आधार को मजबूत बनाए रखने की चुनौती थी। ऐसे में उमेश सिंह कुशवाहा का नेतृत्व जेडीयू के लिए अहम माना जा रहा है। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति अपनी वफादारी बनाए रखी, जिससे पार्टी के भीतर उनकी स्थिति और मजबूत हुई।

चुनावी राजनीति की बात करें तो उमेश सिंह कुशवाहा ने 2015 और 2025 में महनार विधानसभा सीट से जीत हासिल की थी। हालांकि 2020 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसके बावजूद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन पर अपना भरोसा कायम रखा और उन्हें पार्टी संगठन की जिम्मेदारी दी।

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अब तीसरी बार प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद उनके सामने संगठन को और अधिक मजबूत करने की चुनौती होगी। खासकर ऐसे समय में जब बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने की घोषणा की है, जिसके बाद राज्य की राजनीतिक दिशा को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उमेश सिंह कुशवाहा के नेतृत्व में जेडीयू आने वाले समय में अपने पारंपरिक मतदाता आधार को मजबूत करने के साथ-साथ संगठन विस्तार की रणनीति पर भी जोर देगी। इससे पार्टी आगामी चुनावों में खुद को मजबूत स्थिति में बनाए रखने की कोशिश करेगी।

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Abhishek Anand

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