- ढलाई के दौरान 29 मीटर लंबा पुल ढहा
- 2.89 करोड़ की लागत से हो रहा था निर्माण
- गुणवत्ता और निगरानी पर उठे सवाल
- उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज
गोपालगंज जिले के सिधवलिया प्रखंड स्थित गंगवा गांव में घोघारी नदी पर बन रहा निर्माणाधीन आरसीसी पुल सोमवार को ढलाई के दौरान अचानक भरभराकर गिर पड़ा। करीब 29 मीटर लंबे इस पुल का निर्माण लगभग 2 करोड़ 89 लाख 21 हजार रुपये की लागत से कराया जा रहा था। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई, हालांकि राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई मजदूर हताहत नहीं हुआ।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुल के स्लैब की ढलाई का कार्य जारी था। इसी दौरान अचानक तेज आवाज हुई और देखते ही देखते पूरा ढांचा ताश के पत्तों की तरह ढह गया। भारी-भरकम कंक्रीट संरचना कुछ ही क्षणों में नदी में समा गई। मौके पर काम कर रहे मजदूरों ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई। यदि यह हादसा पुल के तैयार होने के बाद होता, तो जानमाल का भारी नुकसान हो सकता था।
गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
घटना के तुरंत बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और निर्माण कार्य में अनियमितता का आरोप लगाया। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण में सीमेंट और बालू के अनुपात में मानकों की अनदेखी की गई। साथ ही, पुल की मजबूती के लिए निर्धारित मोटाई के बजाय पतले और निम्न गुणवत्ता वाले सरिया के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया गया है।
ग्रामीणों ने सेंट्रिंग और सपोर्ट सिस्टम को भी हादसे की बड़ी वजह बताया। उनका दावा है कि ढलाई के दौरान पर्याप्त सपोर्ट नहीं दिया गया, जिससे संरचना भार सहन नहीं कर सकी और अचानक गिर गई।
निर्माण व्यवस्था पर फिर सवाल
बिहार में हाल के वर्षों में निर्माणाधीन पुलों के गिरने की घटनाएं चिंता का विषय बन चुकी हैं। गंगवा की यह घटना इंजीनियरिंग डिजाइन, तकनीकी निगरानी और विभागीय मॉनिटरिंग सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करती है। करोड़ों की योजनाएं, जो ग्रामीणों की सुविधा और आवागमन को सुगम बनाने के लिए बनाई जाती हैं, वे लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार के कारण खतरे में पड़ती दिख रही हैं।
जांच और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि दोषी ठेकेदार और संबंधित अभियंताओं पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। फिलहाल विभागीय टीम ने निर्माण कार्य रोक दिया है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
गौरतलब है कि यह पुल स्थानीय लोगों के लिए आवागमन का महत्वपूर्ण माध्यम बनने वाला था। इसके गिरने से जहां सरकारी धन की क्षति हुई है, वहीं ग्रामीणों की उम्मीदों को भी गहरा झटका लगा है।




