रेलवे की पटरियों पर अब सिर्फ ट्रेनें ही नहीं दौड़ रही हैं, बल्कि सुरक्षा और जवाबदेही की सख्त निगरानी भी लगातार तेज हो गई है। यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए भारतीय रेलवे ने रात्रिकालीन औचक निरीक्षण की नई व्यवस्था लागू कर दी है। इसके तहत रात 12 बजे से सुबह 4 बजे तक रेलवे स्टेशनों, रेलवे फाटकों और ड्यूटी पर तैनात रेलकर्मियों की कार्यप्रणाली की गहन जांच की जा रही है।
रेलवे सूत्रों के अनुसार, प्रत्येक माह की शुरुआत में सुपरवाइजर से लेकर शीर्ष अधिकारियों तक का ड्यूटी रोस्टर गोपनीय रूप से जारी किया जा रहा है। इसी रोस्टर के आधार पर अधिकारी बिना पूर्व सूचना के विभिन्न स्टेशनों और रेलवे परिसरों का औचक निरीक्षण कर रहे हैं। निरीक्षण के दौरान अधिकारी न केवल स्टेशन परिसर, बल्कि ट्रैक, सिग्नलिंग सिस्टम और कर्मचारियों की सतर्कता की भी बारीकी से जांच कर रहे हैं।
इस अभियान के तहत नयानगर रेलवे स्टेशन सहित कई प्रमुख और संवेदनशील स्टेशनों का निरीक्षण किया जा चुका है। जांच के दौरान कुछ स्थानों पर लापरवाही सामने आने पर संबंधित कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है, जिसमें तबादला और चेतावनी जैसी कार्रवाई शामिल है। इससे रेलवे महकमे में सतर्कता और जिम्मेदारी का माहौल और मजबूत हुआ है।
खास बात यह है कि कई वरिष्ठ अधिकारी खुद ट्रेन के लोको पायलट और गार्ड कोच में बैठकर यात्रा कर रहे हैं, ताकि जमीनी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके। अधिकारियों का मानना है कि रात के समय सुरक्षा की असली परीक्षा होती है, क्योंकि इस दौरान गतिविधियां कम होने के कारण लापरवाही की संभावना अधिक रहती है।
रेल प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि सुरक्षा के मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। एडीआरएम और डीआरएम स्तर के अधिकारी स्वयं निरीक्षण कर रहे हैं और दोषी पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है।
इस नई व्यवस्था से रेलवे कर्मचारियों में जिम्मेदारी की भावना और बढ़ी है तथा यात्री भी अब खुद को अधिक सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। रेलवे का यह कदम यात्रियों के विश्वास को मजबूत करने और सुरक्षा व्यवस्था को चौबीसों घंटे प्रभावी बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।




