समस्तीपुर : वर्षों से बंद पड़े समस्तीपुर चीनी मिल को फिर से चालू कराने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। जिला प्रशासन द्वारा मिल के पुनः संचालन की संभावनाओं की जांच के लिए तीन अधिकारियों की टीम गठित किए जाने के फैसले का जिला विकास मंच और अन्य संगठनों ने स्वागत किया है। मंच के नेताओं ने इसे मिल को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक सकारात्मक और महत्वपूर्ण कदम बताया है।
जिलाधिकारी द्वारा 23 फरवरी को अधिकारियों की टीम गठित कर रिपोर्ट मांगे जाने के बाद मंगलवार को जिला विकास मंच और भाकपा माले की संयुक्त टीम ने बंद पड़े चीनी मिल परिसर का दौरा किया और वहां की उपलब्ध सुविधाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान मंच के सदस्य और भाकपा माले नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि समस्तीपुर चीनी मिल का परिसर सभी आवश्यक बुनियादी सुविधाओं से संपन्न है और इसे दोबारा चालू करना पूरी तरह संभव है।
उन्होंने बताया कि चीनी मिल के पास 22 एकड़ से अधिक भूमि उपलब्ध है, जबकि सामान्य रूप से एक चीनी मिल संचालन के लिए 10 एकड़ जमीन पर्याप्त होती है। इसके अलावा मिल परिसर के पास ही बिजली ग्रिड मौजूद है, जिससे मशीनों और उपकरणों को चलाने में कोई समस्या नहीं होगी। रेल परिवहन की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे गन्ने को मिल तक और तैयार चीनी को बाजार तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है।
सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि मिल के चारों ओर सड़क सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे किसानों को गन्ना लाने और चीनी को बाजार तक पहुंचाने में आसानी होगी। पानी की आपूर्ति के लिए मिल के पास बहने वाली बूढ़ी गंडक नदी समेत अन्य जल स्रोत मौजूद हैं, जो मिल संचालन के लिए पर्याप्त हैं। साथ ही गाद निकासी के लिए भी नदी का उपयोग किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि मिल के आसपास वारिसनगर, कल्याणपुर, पूसा, ताजपुर, सरायरंजन और उजियारपुर जैसे क्षेत्र गन्ना उत्पादन के प्रमुख केंद्र रहे हैं, जिससे कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकती है। इसके अलावा क्षेत्र में श्रमिकों की पर्याप्त संख्या भी मौजूद है, जिससे मिल संचालन में श्रमिकों की कमी नहीं होगी।
गौरतलब है कि समस्तीपुर चीनी मिल की स्थापना वर्ष 1917 में अंग्रेजी शासन के दौरान हुई थी और यह बिहार की प्रमुख चीनी मिलों में से एक थी। यहां उच्च गुणवत्ता की चीनी का उत्पादन होता था, लेकिन सरकारी उपेक्षा के कारण वर्ष 1997 में यह मिल बंद हो गई।
जिला विकास मंच और भाकपा माले लंबे समय से मिल को चालू कराने की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। संगठनों का कहना है कि मिल के चालू होने से न केवल किसानों को लाभ मिलेगा, बल्कि क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
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