बिहार में शिक्षक-छात्रा प्रेम, नेपाल शादी से विवाद
बिहार की चर्चित प्रेम कहानी: शिक्षक-छात्रा रिश्ता, नेपाल में शादी और कानूनी विवाद
बिहार से सामने आई एक प्रेम कहानी ने सामाजिक, पारिवारिक और कानूनी बहस को जन्म दे दिया है। 32 वर्षीय शाइस्ता परवीन ने अपने से 18 वर्ष बड़े, चार बच्चों के पिता और पूर्व शिक्षक राकेश साह (50) के साथ नेपाल में मंदिर विवाह कर लिया। यह रिश्ता वर्ष 2009 में शुरू हुआ और 17 साल बाद विवाह तथा एक बच्चे के जन्म तक पहुंचा।
2009 में शुरू हुआ संबंध
शाइस्ता के अनुसार, जब वे स्कूल में पढ़ती थीं, तब राकेश साह उनके शिक्षक थे। पढ़ाई के दौरान ही उन्हें राकेश पसंद आने लगे। समय के साथ बातचीत बढ़ी और कथित तौर पर शाइस्ता ने ही अपने शिक्षक को विवाह का प्रस्ताव दिया। राकेश ने उम्र के अंतर और अपने विवाहित होने का हवाला देकर शुरुआत में इंकार किया, लेकिन शाइस्ता का कहना है कि आपसी सहमति से यह संबंध आगे बढ़ा।
रिश्ते को बनाए रखने के लिए शाइस्ता ने बाद में राकेश के स्कूल ‘मॉर्डन इंग्लिश स्कूल’ में शिक्षिका के रूप में काम करना शुरू किया। उनका दावा है कि बालिग होने के बाद उन्होंने सोच-समझकर इस रिश्ते को आगे बढ़ाया और 2025 में दोनों ने गुपचुप तरीके से विवाह कर लिया।
प्रेग्नेंसी और पारिवारिक विवाद
मामला तब तूल पकड़ गया जब शाइस्ता की पांच महीने की प्रेग्नेंसी की जानकारी परिवार को हुई। शाइस्ता का आरोप है कि परिवार ने उन पर गर्भपात का दबाव डाला और रिश्ता खत्म करने के लिए लालच भी दिया। हालांकि परिवार की ओर से इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
शाइस्ता का कहना है कि उन्होंने बच्चे को जन्म देने और राकेश से ही शादी करने का फैसला नहीं बदला। हाल ही में उन्होंने एक निजी नर्सिंग होम में बच्चे को जन्म दिया है।
नेपाल में शादी और अपहरण का मामला
18 फरवरी को शाइस्ता घर से निकलीं और राकेश के साथ नेपाल पहुंचकर मंदिर में शादी कर ली। इसके बाद शाइस्ता के भाई ने स्थानीय थाने में राकेश साह के खिलाफ अपहरण की एफआईआर दर्ज कराई।
शाइस्ता ने सोशल मीडिया पर शादी की तस्वीरें साझा कर कहा कि वे अपनी मर्जी से नेपाल गई थीं। उनका दावा है कि अपहरण का आरोप निराधार है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामले की जांच जारी है और दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
पेचीदा पारिवारिक समीकरण
राकेश साह पहले से विवाहित हैं और उनके तीन बेटे तथा एक बेटी है। उनके दो बड़े बेटों की शादी भी हो चुकी है। उनकी पत्नी विमल देवी स्थानीय राजनीति में सक्रिय बताई जाती हैं। दूसरी ओर, शाइस्ता 10 भाई-बहनों में पांचवें नंबर पर हैं।
मामले को और जटिल बनाता है यह तथ्य कि शाइस्ता के पिता मतीन अशरफ ने कभी चुनाव में राकेश की पत्नी का प्रस्तावक बनकर समर्थन किया था। आज वही परिवार इस रिश्ते को लेकर आमने-सामने हैं।
कानूनी और सामाजिक पहलू
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि शाइस्ता बालिग हैं और उन्होंने अपनी मर्जी से विवाह किया है, तो अपहरण का मामला टिकना मुश्किल हो सकता है। हालांकि राकेश के पहले से विवाहित होने की स्थिति में दूसरी शादी की वैधता और उससे जुड़े प्रावधानों की जांच आवश्यक होगी।
सामाजिक दृष्टि से यह मामला शिक्षक-छात्रा संबंधों की मर्यादा, उम्र के अंतर और वैवाहिक प्रतिबद्धताओं पर भी सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में सहमति, शक्ति-संतुलन और नैतिक जिम्मेदारियों की गहन जांच जरूरी है।
वर्तमान स्थिति
मामले के सार्वजनिक होने के बाद राकेश साह अपने परिवार के साथ घर में ताला लगाकर चले गए हैं। किसी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए स्कूल के बाहर पुलिस बल तैनात किया गया है।
शाइस्ता ने अपने माता-पिता से मिलने से इनकार किया है और कहा है कि वे अब राकेश के साथ ही रहेंगी। पुलिस प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
निष्कर्ष
यह मामला केवल एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि सामाजिक मान्यताओं, पारिवारिक संबंधों और कानूनी जटिलताओं का संगम है। जहां एक ओर दो बालिग व्यक्तियों की सहमति की बात है, वहीं दूसरी ओर वैवाहिक स्थिति, नैतिकता और परिवारों के बीच टकराव भी है।
जांच के नतीजों और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा कि यह कहानी किस दिशा में आगे बढ़ेगी, लेकिन फिलहाल यह प्रकरण पूरे क्षेत्र में चर्चा और बहस का विषय बना हुआ है।





