कविता
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कविता; वृद्धावस्था और अकेलापन ~ एन मंडल
हर वृद्ध के मन में एक धीमी-सी कविता धड़कती है— जो न शब्द माँगती है, न आवाज़, बस किसी संवेदनशील…
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कविता; अमर शहीद रामफल मंडल को नमन ~ एन मंडल
अमर शहीद रामफल मंडल को नमन हिला दी थी अंग्रेजों की जड़ें, जब तूने हुंकार भरी, उम्र थी केवल उन्नीस,…
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मैं मजदूर हूँ – एन मंडल
हर साल मई की पहली सुबह, जब दुनिया मुझे याद करती है, कुछ पन्नों पर नाम मेरा लिखा जाता है,…
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कविता; देवदूत डाक्टर
परिवार नहीं देखा तुमने ! संसार नहीं देखा तुमने !! हर घर की ख़ुशियाँ बनी रहें , घर बार नहीं…
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Poetry; शायद तुम ही हो
नदियों की कलकल में तुम हो सागर की छल छल में तुम हो, देख रही हूं लहर लहर के– यौवन…
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Kavita : विडंबना
प्रकृति ने भी मचाया होगा हाहाकार कलियों का करने से पहले श्रृंगार सोच में डूबा हुआ सा चिंतन करता बारंबार…
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मेरे जज़्बात कविता – मेघदूत प्रदीप
एक तस्वीर खींचनी है मुझे, अपने सोए हुए जज्बातों की । एक तस्वीर खींचनी है मुझे, अपने ठहरे हुए भावों…
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आसाँ नहीं किसी के दिल में जगह बनाना – श्वेता साँची
खुद को तबाह कर के आखिर ये हम ने जाना , आसां नहीं किसी के दिल में जगह बनाना झोली…
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लोग फ़रिश्ते लगते थे – विनोद कुमार
राह ग़लत जाते ही घर के सब समझाने लगते थे। दौर भी वो कितना सुंदर था लोग फ़रिश्ते लगते थे।…
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