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बिहार राज्यसभा चुनाव: पांचवीं सीट पर तेज सियासी घमासान

बिहार राज्यसभा चुनाव: पांचवीं सीट पर बढ़ी सियासी सरगर्मी, एनडीए–महागठबंधन आमने-सामने

पटना : बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों पर चुनाव की घोषणा होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी हलचल तेज हो गई है। मौजूदा विधानसभा गणित के अनुसार चार सीटों पर एनडीए की जीत लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन असली मुकाबला पांचवीं सीट को लेकर है। इस सीट के लिए अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी, जिससे राजनीतिक जोड़-तोड़ शुरू हो गया है।

राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने पांचवीं सीट पर अपना दावा ठोकते हुए सियासी तापमान बढ़ा दिया है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस और आरजेडी के कई विधायक उनके संपर्क में हैं और इस बार एनडीए पांचों सीटें जीतने जा रहा है। कुशवाहा ने यह भी कहा कि विपक्ष क्रॉस वोटिंग के डर से संभवतः अपना प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारेगा।

कुशवाहा ने याद दिलाया कि विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें एक एमएलसी और एक राज्यसभा सीट देने का वादा किया गया था। उन्होंने उम्मीद जताई कि भाजपा अपना वादा निभाएगी। हालांकि एनडीए के भीतर पांचवीं सीट को लेकर दावेदारी तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक भाजपा और जदयू इस बार जातीय संतुलन साधने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। चर्चा है कि सवर्ण प्रतिनिधित्व को लेकर भाजपा मंथन कर रही है, जिससे कुशवाहा की दावेदारी कमजोर और अन्य संभावित नाम मजबूत माने जा रहे हैं।

बिहार से राज्यसभा की कुल 16 सीटें हैं, जिनमें से पांच सीटों पर 16 मार्च को चुनाव होना है। जदयू के हरिवंश नारायण सिंह और रामनाथ ठाकुर, आरएलएम के उपेंद्र कुशवाहा तथा आरजेडी के प्रेमचंद गुप्ता और अमरेंद्र धारी सिंह का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इन सीटों के रिक्त होने के कारण चुनाव कराया जा रहा है।

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विधानसभा की संख्या के आधार पर एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 41 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है। बिहार में एक विधायक के वोट का मूल्य 100 होता है और एक सीट के लिए 40.5 मतों की जरूरत होती है, जिसे पूर्णांक में 41 माना जाता है। महागठबंधन के पास वर्तमान में 35 विधायक हैं—जिसमें 25 आरजेडी, 6 कांग्रेस, 2 सीपीआई-एमएल, तथा सीपीएम और आईआईपी के एक-एक विधायक शामिल हैं। ऐसे में एक सीट जीतने के लिए उसे अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा।

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इधर, एआईएमआईएम और बसपा के विधायकों की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि विपक्ष एकजुट रहता है तो मुकाबला रोचक हो सकता है, लेकिन क्रॉस वोटिंग की आशंका समीकरण बदल सकती है।

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कुल मिलाकर राज्यसभा की पांचवीं सीट को लेकर सियासी शतरंज बिछ चुकी है। आने वाले दिनों में उम्मीदवारों की घोषणा और संभावित गठजोड़ इस चुनाव को और दिलचस्प बना सकते हैं।

Gaam Ghar Desk

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