
पटना : अमर स्वतंत्रता सेनानी रामफल मंडल को आधिकारिक रूप से ‘शहीद’ का दर्जा देने की मांग अब पटना की सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक जोर पकड़ती जा रही है। फिल्मकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता एन. मंडल द्वारा रामफल मंडल के सम्मान को लेकर चलाया जा रहा अभियान लगातार तेज हो रहा है। इसी बीच सोशल मीडिया पर रामफल मंडल की शहादत और सम्मान से जुड़ा वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहा है, जिसके माध्यम से लोगों से इस मांग के समर्थन में आवाज बुलंद करने की अपील की जा रही है।
एन. मंडल ने इससे पहले बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र और वीडियो संदेश के माध्यम से अपील करते हुए 23 अगस्त 2026 तक रामफल मंडल को शहीद का दर्जा देने की मांग रखी थी। निर्धारित समय तक मांग पर निर्णय नहीं होने के बाद पटना के गर्दनीबाग स्थित धरना स्थल पर आमरण अनशन शुरू किया गया।

आंदोलन के नौवें दिन भी जुगनू मंडल, आदित्य मंडल, राजेश मंडल और मुरारी मंडल अनशन पर डटे हुए हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि उनकी मांग किसी राजनीतिक दल के विरोध की नहीं, बल्कि एक स्वतंत्रता सेनानी की शहादत को उचित सरकारी सम्मान दिलाने की है। प्रशासन की ओर से अनशनकारियों से बातचीत भी की गई है, लेकिन आंदोलनकारियों के अनुसार अभी तक कोई ठोस एवं निर्णायक समाधान सामने नहीं आया है।
एन. मंडल का कहना है कि रामफल मंडल के योगदान और बलिदान को लेकर विभिन्न स्तरों पर सम्मान की पहल पहले से होती रही है। उनके नाम पर डाक टिकट जारी होना, विभिन्न स्थानों पर प्रतिमाएं स्थापित होना तथा शहीद दिवस मनाए जाने जैसी बातों का उल्लेख करते हुए वे सवाल उठा रहे हैं कि जब उनके योगदान को अलग-अलग स्तरों पर सम्मान मिला है, तो उन्हें
आधिकारिक शहीद का दर्जा देने का निर्णय आखिर कब होगा?
एन. मंडल ने लोगों से अपील की है कि यदि वे रामफल मंडल के बलिदान को उचित सम्मान देने के पक्ष में हैं, तो सोशल मीडिया पर वीडियो को अधिक से अधिक साझा करें, ताकि यह आवाज सरकार तक पहुंचे।

आंदोलन के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही बन गया है— “रामफल मंडल को शहीद का दर्जा कब?”
आंदोलनकारियों की मांग है कि सरकार इस विषय पर जल्द सकारात्मक, स्पष्ट और सम्मानजनक निर्णय ले तथा गर्दनीबाग में अनशन पर बैठे युवाओं की मांग का समाधान करे।




