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वायरल हो रही ‘हम धानुक हैं’ कविता, समाज की नई पहचान बनी रचना

फिल्मकार एन. मंडल की रचना ने युवाओं में जगाया स्वाभिमान, शिक्षा, संगठन और सामाजिक चेतना का नया संदेश

फ़िल्मकार एन. मंडल

संवाददाता : धानुक समाज के बीच इन दिनों “हम धानुक हैं!” शीर्षक कविता एक जनभावना का स्वर बनकर उभरी है। सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों—फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और यूट्यूब—पर यह कविता तेजी से साझा की जा रही है। समाज के युवाओं, शिक्षकों, बुद्धिजीवियों, साहित्यकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच यह रचना चर्चा का प्रमुख विषय बन गई है। अनेक लोग इसे केवल एक कविता नहीं, बल्कि समाज के आत्मसम्मान, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक जागरण का घोष मान रहे हैं।

इस कविता के रचनाकार एन. मंडल हैं, जो फिल्मकार, लेखक एवं अखिल भारतीय धानुक एकता महासंघ के राष्ट्रीय कला एवं संस्कृति मंत्री के रूप में सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। उनकी यह रचना धानुक समाज को अपनी ऐतिहासिक विरासत, सामाजिक योगदान और भविष्य की जिम्मेदारियों का बोध कराती है।

धानुक पर कविता

कविता की प्रारंभिक पंक्तियाँ—

“धानुक हैं हम — धरा के दीप,
अन्याय के विरुद्ध सदा अडिग।”

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समाज के संघर्ष, साहस और न्याय के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त करती हैं। पूरी कविता में श्रम, आत्मसम्मान, राष्ट्रनिर्माण, शिक्षा, संगठन और सामाजिक समरसता जैसे विषयों को सरल किंतु प्रभावशाली भाषा में प्रस्तुत किया गया है।

रचना में राजा जनक, माता सीता, भगवान श्रीराम जैसे भारतीय सांस्कृतिक आदर्शों का उल्लेख करते हुए समाज को अपनी गौरवशाली परंपरा और मानवीय मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया गया है। साथ ही यह संदेश भी दिया गया है कि समाज का भविष्य केवल अतीत के गौरव से नहीं, बल्कि शिक्षा, एकता और सकारात्मक नेतृत्व से निर्मित होगा।

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कविता की चर्चित पंक्तियाँ—

“जो हल से धरती सजाते हैं,
और समय आए तो इतिहास बनाते हैं।”

किसानों, श्रमिकों और मेहनतकश वर्ग के सम्मान को नई अभिव्यक्ति देती हैं। वहीं अंतिम संदेश—

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“शिक्षा, संगठन, संकल्प के साथ,
अब अपना स्वर्णिम कल बनाना है।”

युवाओं को शिक्षा प्राप्त करने, संगठित रहने और समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने की प्रेरणा देता है।

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साहित्यकारों और सामाजिक चिंतकों का मानना है कि जब कोई रचना किसी समाज की पीड़ा, संघर्ष, आकांक्षा और आत्मविश्वास को शब्द देती है, तब वह केवल साहित्य नहीं रहती, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बन जाती है। “हम धानुक हैं!” कविता भी इसी कारण समाज के बीच व्यापक स्वीकृति प्राप्त कर रही है।

उल्लेखनीय है कि एन. मंडल लंबे समय से सामाजिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और साहित्यिक विषयों पर सक्रिय लेखन कर रहे हैं। उनकी यह कविता आज धानुक समाज के लिए प्रेरणा, स्वाभिमान और एकजुटता का प्रतीक बनकर उभरी है तथा सोशल मीडिया के माध्यम से नई पीढ़ी तक तेजी से पहुँच रही है।

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