बिहार के समस्तीपुर जिले में भूमिहीन और गरीब परिवारों को बासगीत पर्चा देने की मांग को लेकर आंदोलन तेज होता दिखाई दे रहा है। इस मुद्दे को लेकर अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) की एक बैठक शहर के मालगोदाम चौक स्थित लेनिन आश्रम परिसर में आयोजित की गई।
बैठक की अध्यक्षता शहरी मजदूर महेन्द्र साह ने की, जबकि संचालन मनोज पोद्दार ने किया। इस अवसर पर खेग्रामस के जिला प्रभारी सह राज्य उपाध्यक्ष Jeevch Paswan तथा मनरेगा संघ के जिला प्रभारी Upendra Rai विशेष रूप से मौजूद रहे।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि जिले के विभिन्न क्षेत्रों में वर्षों से बसे गरीब और भूमिहीन परिवारों को हटाने की कार्रवाई की जा रही है, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। नेताओं ने मांग की कि सरकारी जमीन और निजी जमीन पर लंबे समय से बसे गरीबों और भूमिहीनों को बासगीत पर्चा देकर उन्हें स्थायी रूप से बसाया जाए।
बैठक में हसनपुर अंचल के मंगलगढ़ गांव का मुद्दा भी उठाया गया। वक्ताओं का आरोप था कि वहां जमींदारों और पुलिस के गठजोड़ से लगभग 907 घरों को बुलडोजर चलाकर उजाड़ दिया गया और विरोध करने पर कई लोगों पर जानलेवा हमला किया गया, जिसमें दर्जनों लोग घायल हो गए।
नेताओं ने कहा कि जिले के विभिन्न अंचलों में भी गरीबों और भूमिहीनों को हटाने की नोटिस दी जा रही है। ऐसे में प्रशासन को चाहिए कि अंचलाधिकारी द्वारा जारी नोटिस को तुरंत वापस लिया जाए और वर्षों से बसे लोगों को बासगीत पर्चा देकर उन्हें पुनर्वास की सुविधा दी जाए।
बैठक में यह भी कहा गया कि शहर के मालगोदाम चौक से पूरब सड़क किनारे वर्ष 1999-2000 में तत्कालीन जिलाधिकारी और रेलवे प्रबंधन द्वारा कुष्ठ कॉलोनी के रूप में कई गरीब परिवारों को बसाया गया था। वक्ताओं ने मांग की कि वहां रहने वाले गरीबों को भी बासगीत पर्चा दिया जाए, ताकि वे सुरक्षित रूप से वहां रह सकें।
बैठक में चेतावनी दी गई कि यदि भूमिहीनों की मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा। इसी क्रम में 12 मार्च से समस्तीपुर के सरकारी बस स्टैंड परिसर में जिला समाहर्ता के समक्ष “डेरा डालो-घेरा डालो” कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
यह आंदोलन भाकपा (माले) और अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा के संयुक्त बैनर तले चलाया जाएगा। इसकी जानकारी भाकपा (माले) के जिला स्थायी समिति सदस्य Surendra Prasad Singh ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।





