बिहार विधानसभा में छह अहम विधेयक पारित, आम जनता को बड़ी राहत : बिहार विधानसभा के बजट सत्र के समापन से ठीक पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने आम जनता से जुड़े छह महत्वपूर्ण विधेयक पारित करा लिए। 243 सदस्यीय विधानसभा में 202 विधायकों के समर्थन वाली सरकार के लिए इन विधेयकों को पारित कराना आसान रहा। अब ये विधेयक राज्यपाल की मंजूरी और राजपत्र प्रकाशन के बाद कानून का रूप ले लेंगे।
सबसे चर्चित विधेयक ‘बिहार सूक्ष्म वित्त संस्थाएं (धन उधार विनियम एवं प्रपीड़क कार्रवाई निवारण)’ है। इसका उद्देश्य निजी सूदखोरों और माइक्रो फाइनेंस कंपनियों द्वारा की जा रही कथित जबरन वसूली और उत्पीड़न पर रोक लगाना है। नए प्रावधान के तहत यदि जबरन वसूली या अमानवीय व्यवहार की पुष्टि होती है तो दोषियों को पांच साल तक की सजा और 5 से 10 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। त्वरित सुनवाई के लिए विशेष न्यायालयों के गठन का भी प्रावधान किया गया है।
दूसरा बड़ा कदम निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों की फीस पर नियंत्रण को लेकर है। 26 फरवरी को पारित इस विधेयक के लागू होते ही राज्य सरकार प्राइवेट प्रोफेशनल एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स में नामांकन प्रक्रिया और फीस संरचना पर निगरानी रख सकेगी। कैपिटेशन फीस पर पूर्ण रोक लगाई जाएगी। नौ सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति लाइब्रेरी, लैब, कंप्यूटर, हॉस्टल और परीक्षा शुल्क समेत सभी मदों की समीक्षा करेगी। इससे खासकर मध्य वर्गीय परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा ‘बिहार जन विश्वास (प्रावधान संशोधन)’ विधेयक भी पारित किया गया है। इसका उद्देश्य उद्योगपतियों और निवेशकों के लिए कारोबारी माहौल को सरल बनाना है। छोटे और प्रक्रियागत अपराधों के मामलों में अब सीधे जेल भेजने के बजाय आर्थिक दंड का प्रावधान किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे राज्य में निवेश को बढ़ावा मिलेगा और उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार होगा।
इन विधेयकों के पारित होने के साथ ही सरकार ने संकेत दिया है कि उसका फोकस गरीब, मध्य वर्ग और निवेशकों—तीनों वर्गों को संतुलित राहत देने पर है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि कानून लागू होने के बाद इनका जमीनी असर कितना प्रभावी साबित होता है।




