समस्तीपुर : मानव गतिविधियों के कारण प्रकृति के साथ हुए लगातार छेड़छाड़ का खामियाजा अब क्षेत्र की वाया नदी भुगत रही है। कभी निर्मल और कलकल बहने वाली यह नदी आज इस कदर प्रदूषित और सूख चुकी है कि अब आम लोग तो दूर, किसान अपने पशुओं को भी उसमें स्नान कराने से कतराने लगे हैं। नदी का पानी दुर्गंधयुक्त और गंदा हो चुका है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ गए हैं।
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नदी के बिगड़ते स्वरूप का सीधा असर स्थानीय जीवन और पर्यावरण पर पड़ा है। जैव विविधता को भारी नुकसान पहुंचा है। मांगुर, गरई और सिंघी जैसी मछलियों की प्रजातियां अब पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं, जो कभी इस नदी की पहचान हुआ करती थीं। पहले बड़ी मात्रा में मछलियों का उत्पादन होता था, जिससे सैकड़ों परिवारों की आजीविका जुड़ी थी।
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इसके अलावा वाया नदी से पहले घोंघा, केकड़ा, सीप और झींगा जैसे जलीय जीवों का भी बड़े पैमाने पर उत्पादन होता था, जो अब पूरी तरह बंद हो चुका है। इससे मछुआरा समुदाय सबसे अधिक प्रभावित हुआ है, जिनकी रोजी-रोटी छिन गई है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से नदी के संरक्षण, सफाई और पुनर्जीवन के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है ताकि आने वाली पीढ़ियों को इसका दुष्परिणाम न भुगतना पड़े।




