शीतकालीन सत्र कल से शुरू, 13 विधेयक पेश करने की तैयारी में सरकार
Delhi : नई दिल्ली, 30 नवंबर: संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार से प्रारंभ होने जा रहा है, जो 19 दिसंबर तक चलेगा। इस सत्र को राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि सरकार व्यापक विधायी एजेंडा के साथ सदन में उतरने की तैयारी कर चुकी है। सत्र से पहले सरकार ने सभी प्रमुख दलों के नेताओं की सर्वदलीय बैठक आयोजित की, जिसमें 36 दलों के 50 नेता शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य आगामी सत्र को सुचारू, उत्पादक और मुद्दों पर केंद्रित बनाए रखना था।
संसदीय कार्यमंत्री किरेंन रीजीजू ने बैठक के बाद कहा कि सरकार चर्चा और बहस के लिए तैयार है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह सत्र सकारात्मक और प्रभावी रहेगा। सरकार का कहना है कि वह रचनात्मक विमर्श चाहती है, जिससे संसद की गरिमा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया दोनों सशक्त हों।
वहीं, विपक्षी दलों ने भी सत्र के दौरान कई अहम मुद्दों को उठाने की बात कही, जिनमें एसआईआर (Special Investigation Request) और अन्य राष्ट्रीय महत्व के विषय शामिल हैं। विपक्ष ने सरकार से पारदर्शिता और खुली चर्चा सुनिश्चित करने की मांग की है।
13 अहम विधेयक होंगे पेश
शीतकालीन सत्र की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सरकार कुल 13 विधेयक सदन में पेश करने का मन बना चुकी है। इनमें देश की ऊर्जा सुरक्षा, शिक्षा प्रणाली, बुनियादी ढांचा विकास और कॉरपोरेट ढांचे में सुधार से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव शामिल हैं।
सबसे चर्चित विधेयकों में शामिल हैं—
- परमाणु ऊर्जा विधेयक, 2025
- उच्च शिक्षा आयोग विधेयक
- राष्ट्रीय राजमार्ग (संशोधन) विधेयक
- कॉरपोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2025
परमाणु ऊर्जा विधेयक 2025 का उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना और भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्रों में सहयोगात्मक मॉडल को मजबूती देना होगा।
उच्च शिक्षा आयोग विधेयक उच्च शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता, पारदर्शिता और प्रमाणन प्रणाली को एक नए प्रारूप में स्थापित करने का प्रयास है। इससे देश की उच्च शिक्षा नीति में बड़ा सुधार अपेक्षित है।
राष्ट्रीय राजमार्ग (संशोधन) विधेयक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज़, पारदर्शी और विवाद-रहित बनाने पर केंद्रित है। यह संशोधन राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण और विस्तार परियोजनाओं को गति देने में सहायक साबित हो सकता है।
कॉरपोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2025 उद्योगों के लिए नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाने, निवेश माहौल को बेहतर करने और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सत्र से बड़ी उम्मीदें
कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सत्र न केवल विधायी मामलों के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा, बल्कि सदन में कई महत्वपूर्ण बहसें भी देखने को मिलेंगी। विपक्षी दल रोजगार, कीमतों, आंतरिक सुरक्षा, डिजिटल अधिकारों और किसान मुद्दों पर चर्चा की मांग कर सकते हैं। सरकार भी अपनी उपलब्धियों और योजनाओं को सदन में पेश कर सकती है।
संसदीय कार्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार हर उस विषय पर चर्चा के लिए तैयार है, जो जनता के हित में हो। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार-विपक्ष का सहयोग ही संसद की सफलता का आधार है।
संचालित लोकतंत्र की परीक्षा
शीतकालीन सत्र हमेशा से राजनीतिक तापमान बढ़ाने के लिए जाना जाता है। इस बार भी संसद का माहौल गर्म रहने की उम्मीद है। हालांकि सर्वदलीय बैठक में मिली सहमति से प्रतीत होता है कि दोनों पक्ष चर्चा के लिए तैयार हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सदन में किस तरह की बहसें होती हैं और प्रमुख विधेयकों को किस स्तर पर सहमति मिलती है।
संसद के आगामी 20 दिन भारतीय लोकतंत्र की दिशा और गति को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। सरकार जहां अपने विधायी एजेंडा को आगे बढ़ाना चाहती है, वहीं विपक्ष जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाने की तैयारी में है।
शीतकालीन सत्र की शुरुआत के साथ ही देश की निगाहें अब संसद पर टिक गई हैं, जहां आने वाले दिनों में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं।



