पटना : आज पटना फैमिली कोर्ट में पूर्व जोड़े तेजप्रताप यादव और ऐश्वर्या राय के तलाक़ के मुक़दमे में तीसरी बार मध्यस्थता (मेडिएशन) की कोशिश होगी। पिछले दोनों प्रयास विफल रहे हैं और मामला सार्वजनिक और राजनीतिक दोनों तौर पर हाई-प्रोफाइल बना हुआ है। बिहार उच्च न्यायालय ने भी पहली सुनवाई के बाद मध्यस्थता का मार्ग सुझाया था, ताकि घरेलू रिश्तों को अदालत से बाहर सुलह से सुलझाया जा सके। पटना फैमिली कोर्ट में आज की यह बैठक इसी प्रयास की अगली कड़ी है।
मध्यस्थता की दोनों पहले कोशिशों में किन कारणों से सफलता नहीं मिली, इसकी आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है; पर पारिवारिक सूत्रों और वकीलों के मुताबिक अलग-अलग संवेदनशील मुद्दे — निजी व विवादास्पद परिस्थितियाँ — अभी भी अनसुलझी हैं। मामले में ‘अनुष्का’ एंगल की वजह से जटिलता और बढ़ी है, जिससे दोनों पक्षों की रणनीतियाँ और कानूनी दावे प्रभावित हुए हैं। इस तथ्य ने मीडिया और आम दर्शकों में घटनाक्रम को और अधिक सेंसर करने वाला बना दिया है।
फैमिली कोर्ट में आज के सत्र में मध्यस्थ अदालत द्वारा नामांकित न्यायाधिकरणी मध्यस्थ और दोनों पक्षों के वकील मौजूद रहेंगे। आम तौर पर मध्यस्थता में बच्चे-संबंधी कस्टडी, होम-अलायमेंट, संपत्ति बंटवारे और संवेदनशील व्यवहारिक मुद्दों पर गोपनीय बातचीत होती है; सफल समझौते की स्थिति में दोनों पक्ष एक आपसी समझौता ज्ञापन (settlement) पर हस्ताक्षर करते हैं और अदालत उसे मान्य कर देती है।
कानूनी परिप्रेक्ष्य से देखें तो यदि आज भी मध्यस्थता विफल रहती है तो मामला तलाक की औपचारिक सुनवाई के सामान्य मार्ग पर लौटेगा। अदालतें पारिवारिक कानून के प्रावधानों के अनुरूप प्रमाण, गवाह और दलीलें सुनकर आगे का आदेश जारी करेंगी। इस प्रक्रिया में समय लंबा और सार्वजनिक विवाद बढ़ सकता है। दोनों पक्षों के राजनीतिक सन्दर्भ और सार्वजनिक छवि भी निर्णय प्रक्रिया में अप्रत्यक्ष रूप से असर डाल सकती है — यही कारण है कि यह मामला राजनीतिक समुदाय और मीडिया दोनों के लिए संवेदनशील बना हुआ है।
विशेष रूप से ध्यान देने वाली बात यह है कि फैमिली कोर्ट की मध्यस्थता गोपनीय होती है; इसलिए आज के सत्र के दौरान जो बातचीत या समझौते होंगे, वे सार्वजनिक रिपोर्टिंग से अक्सर अलग रह सकते हैं। परन्तु इस हाई-प्रोफाइल केस के चलते किसी भी तरह का परिणाम—चाहे सुलह हो या कड़ा कानूनी संघर्ष—तत्काल प्रभाव और दीर्घकालिक राजनैतिक निहितार्थ दोनों लाएगा।
अदालत के फैसले या मध्यस्थता से निकला समझौता दोनों पक्षों और उनके परिवारों के लिए निर्णायक होगा; इसलिए आज की सुनवाई पर न केवल वकील बल्कि राजनीतिक और सामाजिक पर्यवेक्षकों की भी निगाहें टिक गई हैं।




