पटना में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले ने पूरे बिहार को झकझोर कर रख दिया है। इस हाई-प्रोफाइल केस की जांच अब तेज हो गई है। रविवार को विशेष जांच टीम (SIT) ने प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल पहुंचकर डॉक्टरों से लंबी पूछताछ की और छात्रा की मेडिकल हिस्ट्री खंगाली। इलाज से जुड़े हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है कि किन परिस्थितियों में छात्रा की हालत बिगड़ी और उसकी मौत कैसे हुई।
इस मामले पर डिप्टी सीएम और गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि “कोई भी अपराधी नहीं बचेगा।” उन्होंने बताया कि उच्चस्तरीय टीम जांच कर रही है और डीजीपी खुद इस केस की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। सरकार की तरफ से स्पष्ट संदेश है कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
SIT में ASP सदर अभिनव, SDPO सचिवालय-1 डॉक्टर अन्नू समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। टीम अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ से अलग-अलग पूछताछ कर रही है। उनसे यह जानने की कोशिश हो रही है कि इलाज के दौरान क्या-क्या किया गया, कौन से फैसले लिए गए और कहीं किसी तरह की लापरवाही तो नहीं हुई।
SIT की टीम सहज सर्जरी नर्सिंग होम भी पहुंची, जहां छात्रा का पहला इलाज हुआ था। यह अस्पताल डॉक्टर सहजानंद प्रसाद सिंह का है, जो इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। टीम ने वहां मौजूद डॉक्टरों और काउंटर स्टाफ से पूछताछ कर इलाज की पूरी टाइमलाइन तैयार की है। बताया गया कि छात्रा की हालत बिगड़ने पर उसे प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल रेफर किया गया था।
इस बीच, जब पत्रकारों ने ASP अभिनव से जल्दबाजी में दिए गए बयान पर सवाल किया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और मीडिया से बचते नजर आए। वे अपनी गाड़ी छोड़कर SDPO सचिवालय-1 डॉक्टर अन्नू की गाड़ी में बैठकर निकल गए।
जांच के साथ-साथ इस मामले में सियासत भी तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार और पुलिस पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बिहार की लॉ एंड ऑर्डर व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी है और सरकार सच दबाने की कोशिश कर रही है।
वहीं, रोहिणी ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि “NEET की छात्रा को इंसाफ कब मिलेगा?” उनका कहना है कि यह सिर्फ एक मौत का मामला नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी को उजागर करता है। अब पूरे राज्य की नजरें SIT की रिपोर्ट और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।




