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इज़राइल में नरेंद्र मोदी ने नेसेट संबोधित, सर्वोच्च सम्मान प्राप्त’

इज़राइल दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेसेट को किया संबोधित, ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ से सम्मानित

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने बुधवार को अपने दो दिवसीय इज़राइल दौरे के दौरान वहां की संसद Knesset को संबोधित किया। वह इज़राइली संसद को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। इस ऐतिहासिक अवसर पर उन्हें ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ से सम्मानित किया गया, जो नेसेट का सर्वोच्च सम्मान है।’

प्रधानमंत्री को यह सम्मान भारत और इज़राइल के बीच रणनीतिक संबंधों को सशक्त बनाने में उनके व्यक्तिगत नेतृत्व और असाधारण योगदान की मान्यता में प्रदान किया गया। नेसेट में उनके संबोधन के बाद संसद के अध्यक्ष अमीर ओहाना ने औपचारिक रूप से उन्हें यह पदक प्रदान किया। यह पहली बार है जब किसी भारतीय प्रधानमंत्री को यह प्रतिष्ठित सम्मान दिया गया है।’

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और इज़राइल के गहरे होते संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों, नवाचार और सुरक्षा सहयोग के साझा आधार पर आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत इज़राइल के साथ अपने संबंधों को केवल रणनीतिक साझेदारी के रूप में नहीं, बल्कि विश्वास और पारस्परिक सम्मान पर आधारित मित्रता के रूप में देखता है।

प्रधानमंत्री ने सात अक्तूबर को इज़राइल पर हुए हमले की कड़ी निंदा की और कहा कि आतंकवाद मानवता के खिलाफ अपराध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ हर मोर्चे पर इज़राइल के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा। उन्होंने कहा, “हम आपकी पीड़ा को समझते हैं। भारत आज और भविष्य में भी पूरी दृढ़ता के साथ इज़राइल के साथ खड़ा है।”

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उन्होंने वैश्विक समुदाय से आतंकवाद के विरुद्ध निरंतर और समन्वित कार्रवाई की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवाद का कोई औचित्य नहीं हो सकता और इसे जड़ से समाप्त करने के लिए वैश्विक एकजुटता आवश्यक है। भारत क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने वाले सभी प्रयासों का समर्थन करता है।

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प्रधानमंत्री मोदी को इससे पहले वर्ष 2018 में State of Palestine द्वारा ‘ग्रैंड कॉलर ऑफ द स्टेट ऑफ फलस्तीन’ से भी सम्मानित किया गया था, जो विदेशी नेताओं को दिया जाने वाला सर्वोच्च फलस्तीनी सम्मान है। इस प्रकार प्रधानमंत्री उन चुनिंदा वैश्विक नेताओं में शामिल हैं जिन्हें पश्चिम एशिया के दोनों पक्षों से उच्च सम्मान प्राप्त हुआ है।

विश्लेषकों के अनुसार, यह सम्मान भारत की पश्चिम एशिया नीति की संतुलित और बहुपक्षीय कूटनीति का प्रतीक है। भारत ने इज़राइल के साथ रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत किया है, वहीं फलस्तीन के साथ भी अपने ऐतिहासिक संबंधों को बनाए रखा है।

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नेसेट में प्रधानमंत्री के संबोधन को दोनों देशों के संबंधों में एक नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया क्षेत्र में तनाव बना हुआ है और वैश्विक स्तर पर आतंकवाद तथा सुरक्षा चुनौतियां बढ़ रही हैं। ऐसे परिदृश्य में भारत की स्पष्ट और संतुलित स्थिति को अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने गंभीरता से लिया है।

दौरे के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इज़राइल मिलकर नवाचार, सुरक्षा और मानवता के मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में दोनों देशों के संबंध और भी मजबूत होंगे तथा वैश्विक शांति और स्थिरता में सकारात्मक योगदान देंगे।

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