पटना : बिहार में नई सरकार के गठन और शपथ ग्रहण समारोह के बाद सियासत एक बार फिर गर्म हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस समारोह को देशभर के नेताओं ने भव्य उपस्थिति से खास बना दिया—प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, और करीब 20 राज्यों के मुख्यमंत्री इस आयोजन के साक्षी बने।
विपक्ष, विशेषकर तेजस्वी यादव और RJD-Congress गठबंधन के नेताओं को इस समारोह में औपचारिक निमंत्रण भेजा गया था, लेकिन विपक्ष का कोई भी नेता शपथ ग्रहण में शामिल नहीं हुआ। इसी मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री और LJP(रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान ने तेजस्वी यादव पर तीखी टिप्पणी कर दी, जिस पर अब राजनीतिक हलकों में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।
चिराग पासवान का तंज—“यह एक पॉलिटिशियन को शोभा नहीं देता”
शपथ ग्रहण में तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति पर पूछे गए सवाल के जवाब में चिराग पासवान ने कहा:
“विपक्ष को सकारात्मक पक्ष रखना चाहिए। तेजस्वी यादव कई दिन से चुप हैं। चुनाव हारना राजनीति का हिस्सा है, लेकिन अगर आप एक हार से इतने निराश हैं, तो यह एक पॉलिटिशियन को शोभा नहीं देता।”
चिराग पासवान ने यह भी याद दिलाया कि 2020 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को अपेक्षा अनुसार सफलता नहीं मिली थी, लेकिन तब उन्होंने न तो समारोहों से दूरी बनाई और न ही संवाद से बचने की कोशिश की। उन्होंने कहा:
“2020 में नतीजे हमारे फेवर में नहीं थे, लेकिन हम पहली पार्टी थे जो मीडिया और पब्लिक के सामने आई। मैंने हार स्वीकारी, सवालों के जवाब दिए। तेजस्वी यादव नेता प्रतिपक्ष रहे हैं, उन्हें शपथ समारोह में आना चाहिए था।”
चिराग ने यह भी कहा कि “जब जनादेश स्पष्ट हो चुका है और सरकार बन गई है, तब विपक्ष के प्रमुख चेहरे को जनता और मीडिया के सवालों से भागना नहीं चाहिए।”
विपक्ष की गैरमौजूदगी ने बढ़ाई राजनीतिक तापमान
शपथ समारोह में विपक्ष की पूरी अनुपस्थिति ने बिहार की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दिया है।
- एक ओर एनडीए इसे ‘नकारात्मक राजनीति’ बता रहा है,
- तो दूसरी ओर विपक्ष अभी तक इस पर आधिकारिक बयान से बचता दिख रहा है।
तेजस्वी यादव की चुप्पी और तमाम बड़े कार्यक्रमों से दूरी पहले से ही चर्चाओं में थी। अब चिराग की इस टिप्पणी ने राजनीतिक माहौल को और तीखा बना दिया है।
चिराग पासवान ने दी नीतीश कुमार को शुभकामनाएं
चिराग पासवान ने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बधाई देते हुए लिखा:
“नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण करने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। आपके नेतृत्व में बिहार विकास, सुशासन और स्थिरता के नए आयाम स्थापित करेगा।”
उन्होंने आगे कहा कि वे बिहार फर्स्ट–बिहारी फर्स्ट के संकल्प को पूरा करने के लिए सरकार के साथ मिलकर कार्य करेंगे। चिराग ने भरोसा जताया कि नई सरकार बिहार को प्रगति और समृद्धि के नए मार्ग पर ले जाएगी।
संजय पासवान को मंत्री बनाए जाने पर चिराग का संदेश
चिराग पासवान की पार्टी, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के कोटे से संजय पासवान को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए चिराग पासवान ने लिखा:
“संजय पासवान जी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। दो दशक से अधिक समय से पार्टी और संगठन के प्रति आपका समर्पण अब सम्मान में बदल गया है।”
उन्होंने कहा कि संजय पासवान का अनुभव और सेवा भाव बिहार सरकार में नई ऊर्जा लाएगा और जनता को बेहतर सुविधा और प्रशासन उपलब्ध कराने में मदद करेगा।
चुनाव के बाद की राजनीति में तेजस्वी की चुप्पी—सियासी संकेत?
विधानसभा चुनाव के बाद RJD प्रमुख तेजस्वी यादव लगातार सार्वजनिक जीवन से दूरी बनाए हुए हैं।
- कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं,
- कोई बड़ा बयान नहीं,
- और अब शपथ समारोह से भी दूरी।
यह रणनीति है या निराशा?
इस पर राजनीतिक विश्लेषक दो धड़ों में बंटे हैं।
कुछ इसे “विपक्ष का विरोध का तरीका” बता रहे हैं, जबकि बाकी इसे “रचनात्मक राजनीति से दूरी” मान रहे हैं। चिराग का बयान इस बहस को और हवा देता है।
बिहार की सियासत में बढ़ती दूरी और नए समीकरण
नीतीश कुमार के 10वीं बार मुख्यमंत्री बनने के बाद बिहार की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है।
- NDA ने मजबूत वापसी की है,
- विपक्ष बिखरा हुआ दिख रहा है,
- और नए समीकरण तेजी से बन रहे हैं।
ऐसे में तेजस्वी यादव का शपथ ग्रहण से दूरी बनाए रखना और चिराग पासवान का इस पर खुलकर टिप्पणी करना, आने वाले दिनों में राजनीति को और ऊर्जावान तथा विवादपूर्ण बना सकता है।
तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी, चिराग पासवान की प्रतिक्रिया, और विपक्ष की चुप्पी—ये तीनों मिलकर बिहार की मौजूदा राजनीति में नई परतें जोड़ रहे हैं।
अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि क्या तेजस्वी यादव जल्द सामने आएंगे और विपक्ष की भूमिका को मजबूती से निभाने की जिम्मेदारी उठाएंगे, या फिर NDA इसी तरह विपक्ष की कमज़ोरियों को राजनीतिक हथियार बनाकर आगे बढ़ेगा।



