Digitalबिहारभाषा-साहित्यसमस्तीपुरसमाचार

शिवाजीनगर में सजा साहित्य अकादेमी का ‘ग्रामलोक’ मंच

मैथिली कविता पाठ के दौरान कभी तालियों से गूंजा सभागार, कभी रचनाओं में दिखी गांव की मिट्टी और जीवन की तस्वीर

कार्यक्रम का उद्घाटन करते अंचलाधिकारी अम्बपाली यादव, गाम घर के संरक्षक डॉ. गोविन्द कुमार एवं फ़िल्मकार एन मंडल सहित उपस्थित अतिथि.

शिवाजीनगर (समस्तीपुर)। प्रखंड मुख्यालय स्थित सभागार में बुधवार को साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली और गाम घर, समस्तीपुर के संयुक्त तत्वावधान में ‘ग्रामलोक’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मैथिली कविता पाठ पर केंद्रित इस आयोजन में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, साहित्यप्रेमी और ग्रामीण श्रोता शामिल हुए। अपनी मातृभाषा में साहित्यकारों को सुनने के लिए सभागार में लोगों की अच्छी मौजूदगी रही।

कार्यक्रम का उद्घाटन अंचलाधिकारी अम्बपाली यादव, गाम घर के संरक्षक डॉ. गोविन्द कुमार एवं फ़िल्मकार एन मंडल सहित उपस्थित अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। उद्घाटन के दौरान अंचलाधिकारी अम्बपाली यादव ने मैथिली से अपने आत्मीय जुड़ाव को साझा किया। उन्होंने कहा कि मैथिली उनकी मातृभाषा है और बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा में यह उनका वैकल्पिक विषय भी रहा है। उन्होंने प्रसिद्ध मैथिली साहित्यकार वैद्यनाथ मिश्र ‘यात्री’ की कविता ‘विलाप’ की कुछ पंक्तियां भी सुनाईं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता गाम घर के संरक्षक डॉ. गोविन्द कुमार ने की। कविता पाठ की शुरुआत आशा कुमारी की मैथिली कविता ‘उर्मिला’ से हुई। इसके बाद साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित अमित कुमार मिश्र, शेफालिका झा, रामस्वरूप सहनी ‘रोसड़ाई’, वन्दना चौधरी और अनिरुद्ध झा दिवाकर ने अपनी-अपनी मैथिली रचनाओं का पाठ किया।

रचनाकारों की प्रस्तुतियों के दौरान सभागार का माहौल लगातार बदलता रहा। कहीं श्रोता कविता की पंक्तियों को ध्यान से सुनते रहे तो कहीं अच्छी प्रस्तुति पर तालियों की गूंज सुनाई दी। रचनाओं में प्रेम, समाज, लोकजीवन, रिश्तों और मानवीय संवेदनाओं के अलग-अलग रंग देखने को मिले। मैथिली की सहज और आत्मीय अभिव्यक्ति ने आयोजन को जीवंत बना दिया।

यह भी पढ़ें  बिहार: माफियाओं से गिफ्ट लेने पर दारोगा पर गिरी एसपी की कार्रवाई

गांव और साहित्य के बीच बना सीधा संवाद

‘ग्रामलोक’ कार्यक्रम की खासियत यह रही कि साहित्यिक गतिविधि शहरों और पारंपरिक साहित्यिक मंचों से आगे ग्रामीण परिवेश के बीच पहुंची। मंच पर मौजूद रचनाकारों और सभागार में बैठे स्थानीय श्रोताओं के बीच भाषा और संस्कृति का सीधा जुड़ाव दिखाई दिया।

कार्यक्रम में ऐसे ग्रामीण श्रोता भी पहुंचे, जो नियमित रूप से साहित्यिक आयोजनों में शामिल नहीं होते। अपनी मातृभाषा में कविता सुनने की इच्छा उन्हें कार्यक्रम तक खींच लाई। इससे आयोजन में साहित्य के साथ-साथ स्थानीय समाज की भागीदारी भी नजर आई।

अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. गोविन्द कुमार ने साहित्य अकादेमी और गाम घर को आयोजन के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि गांवों में साहित्य और संस्कृति की समृद्ध परंपरा रही है। ऐसे कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को अपनी भाषा और संस्कृति से जोड़ने के साथ नई पीढ़ी में साहित्य के प्रति रुचि पैदा करने में सहायक हो सकते हैं। उन्होंने भविष्य में शिवाजीनगर में और बड़े स्तर पर मैथिली साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही।

एन. मंडल की पहल से गांव तक पहुंचा साहित्यिक मंच

कार्यक्रम के आयोजन और समन्वय में गाम घर के निदेशक एवं कार्यक्रम के समन्वयक एन. मंडल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। ग्रामीण परिवेश में साहित्य, भाषा और संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों को मंच देने की दिशा में गाम घर की गतिविधियों के तहत ‘ग्रामलोक’ को स्थानीय स्तर पर आयोजित किया गया।

यह भी पढ़ें  NEET छात्रा केस में विरोध का बदला? जान को खतरा -पप्पू यादव

एन. मंडल ने कहा कि गांव केवल साहित्य का विषय नहीं है, बल्कि वह साहित्य की जीवंत जमीन है। गांव की बोली, लोकजीवन, रिश्ते, अनुभव, सुख-दुख और संघर्षों में अनेक कहानियां और कविताएं मौजूद हैं। ‘ग्रामलोक’ के माध्यम से इन अनुभवों और साहित्य के बीच संवाद स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।

सच के साथ खड़े हों — स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें। Gaam Ghar

Donate via UPI

UPI ID: 7903898006@sbi

उन्होंने कहा कि साहित्य को केवल किताबों और बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जब कोई कविता अपने ही गांव के बीच और अपनी ही भाषा में सुनाई जाती है, तो उसका प्रभाव लोगों से सीधे जुड़ता है। उन्होंने कहा कि गाम घर के माध्यम से ग्रामीण समाज की भाषा, संस्कृति और रचनात्मक अभिव्यक्तियों को सामने लाने के लिए आगे भी ऐसे कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा।

एन. मंडल ने कार्यक्रम में साहित्य अकादेमी की सहभागिता को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन से ग्रामीण क्षेत्र के पाठकों और साहित्यकारों के बीच सीधा संवाद संभव होता है। उनका प्रयास है कि गांव के लोग केवल साहित्य के श्रोता ही न रहें, बल्कि अपनी भाषा, लोकजीवन और अनुभवों को साहित्यिक विमर्श का हिस्सा भी बनाएं।

यह भी पढ़ें  पटना में 2000 के नोटों को बदलने का खेल: 9.74 लाख जब्त; 12 हिरासत में

छह रचनाकारों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां

कविता पाठ के दौरान छह मैथिली रचनाकारों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को जोड़े रखा। आशा कुमारी ने ‘उर्मिला’ का पाठ किया, जबकि अमित कुमार मिश्र, शेफालिका झा, रामस्वरूप सहनी ‘रोसड़ाई’, वन्दना चौधरी और अनिरुद्ध झा दिवाकर ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।

रचनाओं के दौरान श्रोताओं की प्रतिक्रियाएं भी देखने लायक रहीं। गंभीर विषयों पर सभागार में शांति छाई रही तो भावपूर्ण और प्रभावी पंक्तियों पर तालियों से रचनाकारों का उत्साह बढ़ाया गया। इस तरह कविता पाठ केवल मंचीय प्रस्तुति न रहकर रचनाकार और श्रोता के बीच संवाद का माध्यम बन गया।

कार्यक्रम के अंत में एन. मंडल ने साहित्य अकादेमी, सभी रचनाकारों, अतिथियों, स्थानीय सहयोगियों और उपस्थित श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया।

सैकड़ों श्रोताओं की मौजूदगी में आयोजित यह कार्यक्रम शिवाजीनगर में मैथिली भाषा और साहित्य के प्रति लोगों की रुचि का परिचायक बना। ‘ग्रामलोक’ के माध्यम से गांव और साहित्य के बीच बना यह संवाद स्थानीय लोगों के लिए एक आत्मीय साहित्यिक अनुभव रहा।

 

Abhishek Anand

Abhishek Anand, Working with Gaam Ghar News as a author. Abhishek is an all rounder, he can write articles on any beat whether it is entertainment, business, politics and sports, he can deal with it.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button