
सीतामढ़ी / पटना : भारत छोड़ो आंदोलन के निर्भीक आंदोलनकारी और अमर शहीद रामफल मंडल की शहादत को सम्मान दिलाने के लिए चली लंबी मुहिम के बाद अब उनके सम्मान की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। बिहार सरकार की घोषणा के अनुसार शहीद रामफल मंडल का शहादत दिवस अब प्रत्येक वर्ष 23 अगस्त को राजकीय समारोह के रूप में मनाया जाएगा।

इस ऐतिहासिक घोषणा के बाद शहीद रामफल मंडल की शहादत की धरती मधुरापुर गांव में भावुक और सम्मानपूर्ण माहौल देखने को मिला। इसी दौरान शहीद रामफल मंडल की प्रतिमा के समक्ष अभियान के सूत्रधार एवं रणनीतिकार फिल्मकार एन. मंडल (N. Mandal) का समाजसेवी राहुल मंडल ने सम्मान किया।
प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर शहीद को किया नमन
मधुरापुर पहुंचने के बाद फिल्मकार एन. मंडल ने सबसे पहले अमर शहीद रामफल मंडल की प्रतिमा पर नमन किया। उनके लिए यह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उस संघर्ष और संकल्प की भावनात्मक परिणति थी, जिसके लिए लंबे समय से आवाज उठाई जा रही थी।
रामफल मंडल के सम्मान को लेकर चली मुहिम में शहादत दिवस को सरकारी स्तर पर सम्मान देने की मांग प्रमुख मुद्दों में रही। सरकार की ओर से 23 अगस्त को राजकीय समारोह के रूप में मनाने की घोषणा के बाद इस अभियान से जुड़े लोगों में खुशी का माहौल है।

शहीद परिवार से मिले एन. मंडल, जानी वर्तमान स्थिति
प्रतिमा पर नमन करने के बाद एन. मंडल ने शहीद रामफल मंडल के परिवार से मुलाकात की। उन्होंने परिवार के सदस्यों से बातचीत कर उनकी वर्तमान स्थिति, उनकी परेशानियों और परिवार की परिस्थितियों के बारे में जानकारी ली।
मुलाकात के दौरान परिवार की ओर से अपनी स्थिति बताते हुए भावुक शब्दों में कहा गया— “देखिए, हम लोग आज कैसे रहते हैं…”
परिवार की बात सुनकर एन. मंडल भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि यह कोई साधारण परिवार नहीं है। यह उस महान स्वतंत्रता सेनानी का परिवार है, जिसने देश की आजादी के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया।
एन. मंडल ने परिवार से कहा कि “आप महान शहीद रामफल मंडल जी का परिवार हैं। रामफल बाबू पर सिर्फ धानुक समाज ही नहीं, पूरे भारत को गर्व है।”
उन्होंने कहा कि शहीद के परिवार का सम्मान और स्वाभिमान समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। रामफल मंडल की शहादत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना भी हम सभी का दायित्व है।
एन. मंडल ने आंदोलनकारियों और संगठनों को दिया जीत का श्रेय
इस अवसर पर एन. मंडल ने कहा कि रामफल मंडल के सम्मान की यह उपलब्धि किसी एक व्यक्ति की जीत नहीं है। यह उन सभी लोगों के संघर्ष की जीत है, जिन्होंने अलग-अलग स्तर पर इस मुहिम को मजबूत किया।
उन्होंने विशेष रूप से अनशनकारी जुगनू मंडल, राजेश मंडल, आदित्य मंडल और मुरारी मंडल सहित उन सभी साथियों का उल्लेख किया, जो आमरण अनशन के दौरान लगातार संघर्ष में जुड़े रहे और अनशन स्थल पर अपनी आवाज बुलंद करते रहे।
एन. मंडल ने कहा कि इस संघर्ष में साथ देने वाले सभी संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। उनके अनुसार, जब किसी ऐतिहासिक व्यक्तित्व के सम्मान का सवाल उठता है, तो व्यक्तिगत पहचान से ऊपर उठकर सामूहिक प्रयास ही परिवर्तन का रास्ता बनाता है।
उन्होंने कहा कि “यह सिर्फ एक जीत नहीं है। यह एक शहीद के सम्मान की जीत है। यह उनके परिवार के स्वाभिमान की जीत है। यह पूरे बिहार की जीत है और पूरे धानुक समाज की जीत है।”
संघर्ष से सम्मान तक पहुंची आवाज
रामफल मंडल के सम्मान को लेकर चलाए गए अभियान ने समय के साथ व्यापक रूप लिया। लगातार मांग, सामाजिक जागरूकता, धरना, अनशन और विभिन्न स्तरों पर प्रयासों के बाद सरकार की ओर से 23 अगस्त को राजकीय समारोह के रूप में शहादत दिवस मनाने की घोषणा को आंदोलन से जुड़े लोगों ने बड़ी उपलब्धि माना है।
एन. मंडल ने कहा कि यह शुरुआत है और रामफल मंडल की शहादत, उनके संघर्ष और उनके परिवार के सम्मान को इतिहास में उचित स्थान दिलाने के लिए प्रयास आगे भी जारी रहना चाहिए।
बता दें कि फिल्मकार एन. मंडल अखिल भारतीय धानुक एकता महासंघ के राष्ट्रीय कला एवं संस्कृति मंत्री हैं। फिल्म और सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ वे ऐतिहासिक एवं सामाजिक विषयों से जुड़े अभियानों में भी सक्रिय रहे हैं।
मधुरापुर में हुए इस कार्यक्रम ने एक बार फिर शहीद रामफल मंडल की स्मृति को केंद्र में ला दिया। प्रतिमा के सामने सम्मान, परिवार से मुलाकात और संघर्ष के साथियों को याद करना इस पूरे अभियान की भावनात्मक तस्वीर बन गया।
अंत में उपस्थित लोगों ने एक स्वर में कहा—
अमर शहीद रामफल मंडल अमर रहें।
रामफल बाबू का सम्मान—हमारा स्वाभिमान।





