बिहार में जमीन खरीद-बिक्री की प्रक्रिया अब अधिक पारदर्शी और सुरक्षित होने जा रही है। राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 से नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत बिना पूरी जांच के किसी भी जमीन की रजिस्ट्री नहीं की जाएगी। यानी अब जमीन का सौदा कागज पर पक्का होने से पहले उसकी पूरी “कुंडली” ऑनलाइन सामने होगी।
नई व्यवस्था के अनुसार खरीदार को सबसे पहले ई-निबंधन पोर्टल पर अपना अकाउंट बनाना होगा। लॉग-इन करने के बाद उसे जमीन से संबंधित 13 प्रकार की विस्तृत जानकारियां भरनी होंगी। इनमें रजिस्ट्री कार्यालय का नाम, अंचल, मौजा, थाना नंबर, खाता-खेसरा नंबर, जमीन का रकबा, चौहद्दी, जमाबंदी नंबर, जमाबंदी धारक का नाम, जमीन का प्रकार तथा क्रेता-विक्रेता की पूरी जानकारी शामिल होगी।
सभी विवरण भरने के बाद पोर्टल पर एक विकल्प उपलब्ध रहेगा—क्या आप जमीन की मौजूदा स्थिति जानना चाहते हैं? यदि आवेदक ‘हां’ का चयन करता है, तो आवेदन स्वतः संबंधित अंचलाधिकारी (सीओ) और राजस्व कर्मचारी के लॉग-इन में पहुंच जाएगा। इसके बाद अधिकारियों को 10 दिनों के भीतर जमीन की स्थिति की जांच कर रिपोर्ट तैयार करनी होगी।
यह रिपोर्ट सीधे आवेदक के पोर्टल अकाउंट पर अपलोड की जाएगी। साथ ही आवेदन से संबंधित अपडेट की सूचना एसएमएस के माध्यम से भी दी जाएगी। इससे खरीदार को पहले ही यह स्पष्ट हो जाएगा कि जमीन पर कोई विवाद, बकाया कर, कानूनी अड़चन या अन्य समस्या तो नहीं है।
सरकार का मानना है कि इस डिजिटल व्यवस्था से जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े, दोहरी रजिस्ट्री, फर्जी दस्तावेज और लंबे कानूनी विवादों पर प्रभावी रोक लगेगी। पारदर्शिता बढ़ने से खरीदार और विक्रेता दोनों को सुरक्षा मिलेगी।
कुल मिलाकर, यह नई प्रणाली जमीन खरीदने की प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय, जवाबदेह और आधुनिक बनाएगी। डिजिटल निगरानी और समयबद्ध जांच से आम लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।




