औरंगाबाद : बहुप्रतीक्षित और अंतरराज्यीय उत्तर कोयल नहर परियोजना से बिहार और झारखंड के किसानों के लिए नई उम्मीद जगी है। निर्माण कार्य में आई तेजी के बाद यह संभावना जताई जा रही है कि वर्ष 2026 से किसानों को नियमित रूप से सिंचाई का पानी मिलने लगेगा। इससे खासकर बिहार के औरंगाबाद, गया, जहानाबाद, अरवल तथा झारखंड के पलामू, गढ़वा और लातेहार जिलों के किसानों को बड़ा लाभ होगा।
पिछले वर्ष नवंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा औरंगाबाद में आयोजित एक जनसभा के दौरान परियोजना का उल्लेख किए जाने के बाद केंद्र और राज्य सरकारों के स्तर पर इसकी मॉनिटरिंग और तेज हो गई है। वर्तमान में बिहार सरकार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत तथा औरंगाबाद और गया के जिलाधिकारी नियमित रूप से निर्माण कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं, जिससे कार्य प्रगति में निरंतरता बनी हुई है।
उत्तर कोयल नहर परियोजना की शुरुआत वर्ष 1975 में की गई थी। इसका उद्देश्य तत्कालीन एकीकृत बिहार के सात जिलों की लगभग 1.25 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना था। हालांकि, नक्सली गतिविधियों, पर्यावरणीय स्वीकृति में देरी, भूमि अधिग्रहण की बाधाएं और धनाभाव के कारण यह परियोजना दशकों तक ठप पड़ी रही।
केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के गठन के बाद इस परियोजना को पुनर्जीवित किया गया। तत्कालीन सांसद सुशील कुमार सिंह के प्रयासों से केंद्र सरकार ने 4,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की। इसके साथ ही बिहार सरकार और जिला प्रशासन ने भूमि अधिग्रहण से जुड़ी समस्याओं का समाधान किया।
परियोजना के पूर्ण होने पर कुल सिंचित क्षेत्र का लगभग 84 प्रतिशत हिस्सा बिहार और 16 प्रतिशत झारखंड में होगा। औरंगाबाद की नव नियुक्त जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने कहा कि परियोजना को समय पर पूरा कराना प्रशासन की प्राथमिकता है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नहर निर्माण में तेजी आने से औरंगाबाद के नबीनगर और कुटुंबा प्रखंड के किसानों में उत्साह है। कुटुंबा गांव के किसान कमलेश कुमार, संतोष कुमार और आफताब खान का कहना है कि नहर के पक्कीकरण से अब पानी की बर्बादी रुकेगी और खेतों तक पर्याप्त पानी पहुंचेगा।
उत्तर कोयल नहर परियोजना को क्षेत्र की जीवनरेखा माना जाता है। इसके पूरा होने से न केवल कृषि उत्पादन बढ़ेगा बल्कि किसानों की आय में वृद्धि, ग्रामीण रोजगार सृजन और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को भी बल मिलेगा।



