नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। गृह मंत्रालय द्वारा जारी इस आदेश के अनुसार अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और प्रमुख राष्ट्रीय आयोजनों में ‘वंदे मातरम् – Vande Mataram’ के सभी छह छंद बजाना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही सभी लोगों को गीत के समय उसी तरह खड़े होकर सम्मान देना होगा, जैसे राष्ट्रगान ‘जन गण मन – Jana Gana Mana’ के दौरान किया जाता है। हालांकि, सिनेमा हॉल में फिल्मों से पहले यह नियम लागू नहीं होगा।
सरकार का यह फैसला स्वतंत्रता संग्राम के इस ऐतिहासिक गीत को उसकी “मूल शक्ति और भाव” के साथ पुनः स्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। नए निर्देशों के अनुसार अब कार्यक्रमों में पहले ‘जन गण मन’ और उसके तुरंत बाद ‘वंदे मातरम्’ बजाया जाएगा।
सरकारी आयोजनों में अनिवार्य होगा ‘वंदे मातरम्’
गृह मंत्रालय ने साफ किया है कि अब राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यपालों के आगमन और प्रस्थान के समय, नागरिक सम्मान समारोहों (जैसे पद्म पुरस्कार), तिरंगा फहराने के अवसरों और स्कूलों के राष्ट्रीय कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह छंद गाए या बजाए जाएंगे।
जब भी यह गीत बजेगा, वहां मौजूद सभी लोगों को ध्यान मुद्रा में खड़े रहकर सम्मान देना होगा। मंत्रालय का कहना है कि यह कदम युवाओं और छात्रों में राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।
क्यों खास हैं ‘वंदे मातरम्’ के छह छंद?
‘वंदे मातरम्’ की रचना प्रसिद्ध साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में की थी और यह 1882 में उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ में प्रकाशित हुआ। इसमें कुल छह छंद हैं।
प्रारंभिक दो छंदों में भारत माता को हरियाली, नदियों, फूलों और शांति की देवी के रूप में चित्रित किया गया है। बाद के छंदों में दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती जैसी देवियों का उल्लेख है, जो शक्ति, समृद्धि और ज्ञान का प्रतीक हैं।
1937 में कांग्रेस के फैजपुर अधिवेशन में केवल पहले दो छंदों को आधिकारिक रूप से अपनाया गया था, क्योंकि कुछ समुदायों को देवी-देवताओं के उल्लेख पर आपत्ति थी। अब सरकार ने निर्णय लिया है कि पूरा गीत — सभी छह छंद — बजाए जाएंगे, जिसकी कुल अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड होगी।
स्कूलों में लागू होंगे नए नियम
नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, स्कूलों में राष्ट्रीय पर्व, प्रार्थना सभा और विशेष कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह छंद गाए जाएंगे। शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि इससे बच्चों में देशभक्ति की भावना और ऐतिहासिक समझ विकसित होगी।
सिनेमा हॉल को मिली छूट
हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिल्मों से पहले सिनेमाघरों में ‘वंदे मातरम्’ बजाना अनिवार्य नहीं होगा। इसका कारण यह बताया गया है कि सिनेमाघर मनोरंजन का माध्यम हैं और वहां दर्शकों को मजबूरी में खड़ा करना व्यवहारिक नहीं होगा।
राष्ट्रभक्ति को नई ऊर्जा देने की कोशिश
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला देश की सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करने की कोशिश है। ‘वंदे मातरम्’ सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक रहा है, जिसने लाखों लोगों को आंदोलन के लिए प्रेरित किया।
सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य लोगों को इतिहास, बलिदान और राष्ट्रप्रेम से जोड़ना है — ताकि नई पीढ़ी सिर्फ आधुनिक भारत ही नहीं, बल्कि उसके संघर्षों और मूल्यों को भी समझ सके।





