पटना: उत्तराखंड के एक मंत्री पति द्वारा बिहारी महिलाओं को लेकर दिए गए कथित आपत्तिजनक बयान पर बिहार सरकार की खेल एवं आईटी मंत्री श्रेयसी सिंह ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस बयान को “बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, निंदनीय और महिलाओं के सम्मान के खिलाफ” बताया है। मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोगों को अपनी भाषा और शब्दों के चयन में बेहद सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि उनके बयान समाज पर गहरा प्रभाव डालते हैं।
श्रेयसी सिंह ने कहा कि भले ही संबंधित व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर माफी मांग ली हो, लेकिन इस तरह के बयान इतने गंभीर होते हैं कि उन्हें सिर्फ एक माफीनामे से हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने कहा, “यह केवल एक व्यक्ति की सोच नहीं, बल्कि समाज में मौजूद एक खतरनाक मानसिकता को दर्शाता है। इस तरह की सोच को चुनौती देना जरूरी है।”
“ऐसे बयान समाज को गलत दिशा में ले जाते हैं”
मंत्री ने कहा कि महिलाओं को लेकर इस तरह की टिप्पणी उनकी गरिमा और सम्मान को ठेस पहुंचाती है और समाज में गलत संदेश देती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना भाषा का प्रयोग नहीं करेगा।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जरूरी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कोई भी किसी समुदाय या वर्ग के सम्मान को ठेस पहुंचाए।
खेल और युवाओं को लेकर सरकार की योजनाएं
इस दौरान मंत्री श्रेयसी सिंह ने बिहार सरकार द्वारा खेलों को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही योजनाओं की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार खिलाड़ियों को बेहतर अवसर और संसाधन देने के लिए लगातार नई पहल कर रही है।
उन्होंने कहा कि जल्द ही एक स्पॉन्सरशिप पोर्टल शुरू किया जाएगा, जिसके माध्यम से उभरते खिलाड़ियों को आर्थिक सहायता मिलेगी। एक स्तर पर खिलाड़ियों को तीन लाख रुपये और दूसरे स्तर पर पांच लाख रुपये तक की सहायता दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि “मेडल लाओ, नौकरी पाओ” जैसी योजनाओं ने खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाया है और अब खेल केवल शौक नहीं बल्कि करियर और रोजगार का मजबूत माध्यम बन रहा है।
खेल आधारभूत ढांचे को किया जा रहा मजबूत
श्रेयसी सिंह ने कहा कि बिहार में खेलों के लिए आधारभूत संरचना को मजबूत किया जा रहा है। जमुई को शूटिंग स्पोर्ट्स हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जबकि बांका को वाटर स्पोर्ट्स के लिए चुना गया है। इसके अलावा स्विमिंग और अन्य खेलों को भी बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जा रहा है।
उन्होंने एकलव्य कॉलेज योजना का जिक्र करते हुए कहा कि पहले प्रत्येक जिले में एक कॉलेज खोलने की योजना थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 68 एकलव्य कॉलेज कर दिया गया है। वर्तमान में 15 कॉलेज संचालित हो रहे हैं और वित्तीय वर्ष के अंत तक सभी 68 कॉलेज शुरू कर दिए जाएंगे।
आईटी सेक्टर और निवेश पर फोकस
आईटी सेक्टर को लेकर मंत्री ने बताया कि अब तक 10 से अधिक एमओयू साइन किए जा चुके हैं और निजी निवेशक तेजी से बिहार की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इससे राज्य के युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलने की उम्मीद है।
नीतीश कुमार के बेटे की राजनीति में एंट्री पर प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की राजनीति में संभावित एंट्री पर मंत्री ने कहा कि यदि वह राजनीति में आते हैं तो इसमें कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि हर बच्चे के लिए उसके माता-पिता ही सबसे बड़े रोल मॉडल होते हैं और नीतीश कुमार ने बिहार को गुंडाराज से निकालकर विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाया है।
श्रेयसी सिंह का यह बयान न केवल महिलाओं के सम्मान के सवाल को केंद्र में लाता है, बल्कि यह भी बताता है कि सार्वजनिक जीवन में भाषा की जिम्मेदारी कितनी अहम है। साथ ही, उन्होंने खेल, शिक्षा और आईटी के माध्यम से बिहार के भविष्य की तस्वीर भी पेश की, जो राज्य के युवाओं के लिए नई उम्मीद लेकर आती है।




