Bihar के शहरी इलाकों में जलजमाव की लगातार बढ़ती समस्या को देखते हुए राज्य सरकार ने सड़क निर्माण को लेकर बड़ा और सख्त फैसला लिया है। अब शहरों में किसी भी सड़क की ऊंचाई मनमाने तरीके से नहीं बढ़ाई जा सकेगी। सड़क का लेवल बढ़ाने से पहले पथ निर्माण विभाग से विधिवत अनुमति लेना अनिवार्य होगा। बिना डॉक्यूमेंटेड स्वीकृति के किसी भी परिस्थिति में लेवल राइज की इजाजत नहीं दी जाएगी।
यह निर्णय Patna High Court के निर्देश के बाद लिया गया है। पटना हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान अदालत ने शहरी सड़कों की बढ़ती ऊंचाई और खराब ड्रेनेज व्यवस्था पर गंभीर टिप्पणी की थी। अदालत ने स्पष्ट कहा था कि सड़क निर्माण या मरम्मत के दौरान जल निकासी प्रणाली की अनदेखी नहीं की जा सकती। यदि ड्रेनेज सिस्टम दुरुस्त नहीं होगा तो हर बारिश में शहरों को जलभराव झेलना पड़ेगा।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद पथ निर्माण विभाग ने सभी मुख्य अभियंताओं, अधीक्षण अभियंताओं, कार्यपालक अभियंताओं, सहायक अभियंताओं और कनीय अभियंताओं को निर्देश जारी कर दिए हैं। नए आदेश के मुताबिक अब किसी भी सड़क निर्माण या मरम्मत कार्य से पहले टोपोग्राफिक सर्वे अनिवार्य होगा। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ही सड़क का प्रोफाइल तय किया जाएगा। क्वालिटी कंट्रोल टीम इस रिपोर्ट की जांच करेगी और सुनिश्चित करेगी कि निर्धारित मानकों का सख्ती से पालन हो।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब सड़क की ऊपरी परत पर परत चढ़ाने की परंपरा खत्म की जाएगी। मरम्मत के दौरान पुरानी और क्षतिग्रस्त परतों को हटाया जाएगा और निर्माण कार्य सबसे निचली परत से शुरू होगा। इससे सड़क का स्तर अनावश्यक रूप से ऊंचा नहीं होगा और आसपास के घरों व दुकानों से सड़क नीचे ही रहेगी, जिससे पानी की निकासी बाधित नहीं होगी।
विधान परिषद में भी इस मुद्दे को उठाया गया था। पथ निर्माण मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने जवाब देते हुए कहा कि अब आबादी वाले क्षेत्रों और बाजारों में सड़क किनारे ड्रेनेज निर्माण को अनिवार्य किया गया है। बाजार क्षेत्रों में फुटपाथ और रैंप निर्माण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि पैदल आवागमन और जल निकासी दोनों व्यवस्थित रहें।
राज्य सरकार का कहना है कि सड़क निर्माण से जलजमाव की समस्या बढ़ने के बजाय कम होनी चाहिए। नए नियमों के लागू होने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि हर बारिश के बाद शहरों में होने वाली जलभराव की परेशानी में उल्लेखनीय कमी आएगी और शहरी बुनियादी ढांचे में सुधार देखने को मिलेगा।




