भारत में कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन खेलों को देगा नई उड़ान: पवन शेहरावत
नई दिल्ली : भारत को 2030 राष्ट्रमंडल (कॉमनवेल्थ) खेलों की मेजबानी मिलने के बाद देशभर में खेलप्रेमियों और खिलाड़ियों में खुशी की लहर दौड़ गई है। इसी उत्साह को साझा करते हुए भारतीय कबड्डी टीम के स्टार खिलाड़ी पवन शेहरावत ने डीडी न्यूज से खास बातचीत में कहा कि यह अवसर भारतीय खेलों को वैश्विक स्तर पर एक नया आयाम देने वाला साबित होगा।
डीडी संवाददाता नारायण सिंह से बात करते हुए पवन शेहरावत ने कहा कि 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स केवल एक खेल आयोजन नहीं होगा, बल्कि यह भारत के खेल बुनियादी ढांचे, खिलाड़ियों की तैयारी, और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के स्तर को नई दिशा देगा। उन्होंने कहा, “भारत में इस स्तर का आयोजन होना सिर्फ गर्व की बात नहीं है, बल्कि यह देश के हर खिलाड़ी को आत्मविश्वास देगा कि वह विश्व मंच पर अपनी पहचान बना सकता है।”
शेहरावत ने खास तौर पर इस बात पर जोर दिया कि 2030 के खेलों में भारतीय पारंपरिक खेलों को भी शामिल करने का प्रयास किया जाएगा। उनका मानना है कि कबड्डी, खो-खो, मलखंब जैसे खेल भारत की पहचान हैं और इन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच मिलने से इनकी लोकप्रियता और सम्मान में अभूतपूर्व वृद्धि होगी। उन्होंने कहा, “अगर भारतीय खेलों को कॉमनवेल्थ गेम्स में जगह मिलती है, तो यह हमारे खिलाड़ियों के लिए भी एक बड़ा अवसर होगा। इससे हमारी खेल संस्कृति को वैश्विक पहचान मिलेगी।”
भारत की मेजबानी को लेकर उन्होंने कहा कि देश में खेल सुविधाएँ तेजी से विकसित हो रही हैं—ओलंपिक स्तर की स्टेडियम सुविधाएँ, हाई-परफॉर्मेंस ट्रेनिंग सेंटर, वैज्ञानिक कोचिंग सिस्टम और आधुनिक फिटनेस टेक्नोलॉजी खिलाड़ियों को विश्व स्तरीय प्रदर्शन के लिए प्रेरित करती हैं। 2030 तक भारत का खेल इकोसिस्टम और मजबूत होगा, जिसका सीधा लाभ भारतीय खिलाड़ियों को मिलेगा।
शेहरावत ने यह भी कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन युवाओं में खेल के प्रति रुचि को बढ़ाएगा। अधिक से अधिक बच्चे खेल को करियर मानकर आगे आएँगे, जिससे देश में स्पोर्ट्स कल्चर और मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी से देश में पर्यटन, आर्थिक गतिविधियाँ और वैश्विक सहयोग भी बढ़ेगा।
डीडी न्यूज के इस विशेष कार्यक्रम में शेहरावत ने अपने अनुभव भी साझा किए और कहा कि भारतीय खिलाड़ियों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं, बस उन्हें दुनिया के सबसे बड़े मंचों पर खेलने के अवसर चाहिए। 2030 गेम्स इसके लिए सही मौका साबित होंगे।
रिपोर्टर: नारायण सिंह




