समस्तीपुर अनुमंडल न्यायालय में माता-पिता के भरण-पोषण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई की गई। इस मामले की अध्यक्षता अनुमंडल पदाधिकारी-सह-अनुमंडल दंडाधिकारी दिलीप कुमार ने की। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलों को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना गया तथा प्रस्तुत अभिलेखों और तथ्यों का विधिसम्मत परीक्षण किया गया।
सुनवाई के क्रम में एसडीओ ने स्पष्ट कहा कि माता-पिता का भरण-पोषण करना संतान का केवल नैतिक दायित्व ही नहीं, बल्कि यह कानूनन अनिवार्य जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों की उपेक्षा किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है और प्रशासन ऐसे मामलों में त्वरित एवं न्यायोचित कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है।
अनुमंडल पदाधिकारी ने निष्पक्षता और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए दोनों पक्षों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। साथ ही मामले की अगली सुनवाई के लिए तिथि निर्धारित की गई, ताकि उचित तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर न्याय सुनिश्चित किया जा सके।
इस कार्यवाही को आमजन और सामाजिक संगठनों ने सराहा है। लोगों का कहना है कि प्रशासन का यह रुख समाज में बुजुर्गों के प्रति सम्मान और सुरक्षा की भावना को मजबूत करेगा।
यह सुनवाई इस बात का प्रमाण है कि समस्तीपुर अनुमंडल प्रशासन वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और न्याय सुनिश्चित करने के लिए पूर्णतः सजग और प्रतिबद्ध है।




