सरकार सख्त: 3 घंटे में हटेंगे डीपफेक वीडियो, लागू हुए IT नियम 2026
AI कंटेंट पर सरकार सख्त: 3 घंटे में हटेगा डीपफेक वीडियो — आईटी संशोधन नियम, 2026 लागू
नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने डिजिटल दुनिया में एआई-जनित सामग्री (AI-generated content) के दुरुपयोग को रोकने के लिए कड़ा कदम उठाया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने “आईटी संशोधन नियम, 2026” जारी कर दिए हैं, जो 20 फरवरी 2026 से लागू होंगे। इन नियमों का उद्देश्य सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बनती और फैलती डीपफेक तथा सिंथेटिक सामग्री पर नियंत्रण लगाना और यूज़र्स की सुरक्षा सुनिश्चित कराना है।
नियमों के प्रमुख बिंदु
• एआई कंटेंट की लेबलिंग अनिवार्य: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और डिजिटल मीडिया संस्थाओं को अब AI-जनित या AI-संशोधित सामग्री को स्पष्ट रूप से टैग/लेबल करना होगा ताकि उपयोगकर्ता जान सकें कि जो कंटेंट वे देख रहे हैं वह मनुष्य ने बनाया है या मशीन ने।
• प्रोवेंस/मेटाडेटा एम्बेड करना: जहाँ तक तकनीकी रूप से संभव होगा, प्लेटफॉर्म्स को ऐसे कंटेंट में परमानेंट मेटाडेटा या provenance identifiers एम्बेड करने होंगे, ताकि कंटेंट के ओरिजिन और निर्माण के बारे में ट्रेस किया जा सके।
• तीन घंटे में टेकडाउन अनिवार्य: गंभीर मामलों में — जैसे डीपफेक वीडियो, बिना सहमति की इंटिमेट इमेजरी, बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री — प्लेटफॉर्म्स को टेकडाउन नोटिस मिलने के 3 घंटे के अंदर कार्रवाई करनी होगी। शिकायतों के निपटारे और जवाब देने की कुल टाइमलाइन भी काफी शॉर्ट कर दी गई है।
• अनुचित कंटेंट की परिभाषा: नियमों में स्पष्ट किया गया है कि किसी की निजता का उल्लंघन, अश्लील/सेक्सुअली एक्सप्लिसिट सामग्री, पेडोफिलिक या बाल यौन दुरुपयोग का चित्रण, और बिना सहमति के इंटिमेट इमेजरी जैसी सिंथेटिक सामग्री पूरी तरह निषिद्ध मानी जाएगी।
• जवाबदेही और सज़ा: नियमों का पालन न करने पर प्लेटफॉर्म्स और इंटरमीडियरीज़ पर इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000 तथा अन्य आपराधिक कानूनों के तहत दंडनीय कार्रवाई हो सकती है।
सरकार का तर्क और पक्षधरता
MeitY ने कहा है कि ये नियम उभरती AI टेक्नोलॉजी के दुरुपयोग को रोकने, गलत सूचना और मनगढ़ंत वीडियो के कारण हो सकने वाले नुकसान से नागरिकों की रक्षा करने और डिजिटल पारदर्शिता बढ़ाने के मकसद से लाए गए हैं। साथ ही मंत्रालय ने कहा है कि नियमों का उद्देश्य इनोवेशन को रोकना नहीं, बल्कि सुरक्षा और जवाबदेही के साथ तकनीक के लाभों को संतुलित करना है।
प्लेटफॉर्म्स के सामने चुनौतियाँ
सोशल मीडिया कंपनियों के लिए अब चुनौती यह होगी कि वे तकनीकी रूप से कैसे provenance embed करें और हर शिकायत पर तेज़ी से कार्रवाई करें। छोटे प्लेटफॉर्म्स और स्टार्टअप्स के लिए यह अनुपालन का बोझ बढ़ा सकता है। वहीं निजता, सूचना की स्वतंत्रता और टेक्नोलॉजी इनोवेशन के बीच संतुलन बनाए रखना भी एक जटिल काम होगा।
विशेषज्ञों की संभावित प्रतिक्रिया
कई तकनीकी और स्वतंत्रता-समर्थन विशेषज्ञ नियमों की स्वागतज्ञ करेंगे अगर वे पारदर्शी तरीके से लागू हों और ओवररेच न करें। दूसरी तरफ़ कुछ आवाज़ें गोपनीयता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और छोटे प्लेटफॉर्म्स पर अनुपातहीन प्रभाव को लेकर चिंतित भी हो सकती हैं।
20 फरवरी से लागू होने वाले ये नियम डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर AI सामग्री पर कड़ा नियंत्रण ला सकते हैं — खासकर डीपफेक और बिना सहमति वाली इमेजरी से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई के प्रावधान इसे प्रभावी बनाते हैं। अब यह देखना रहेगा कि प्लेटफॉर्म और समाज इन नियमों के संतुलित और प्रभावी अनुपालन को कैसे सुनिश्चित करते हैं।




