पटना : बिहार सरकार ने सामाजिक न्याय और शिक्षा में समान अवसर को मजबूत करते हुए पिछड़ा एवं अति पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं के लिए ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में तीन बड़े निर्णयों पर मुहर लगी है, जिनसे राज्य के लाखों विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “न्याय के साथ विकास” के संकल्प के तहत सरकार का लक्ष्य है कि आर्थिक कारणों से किसी भी मेधावी छात्र की पढ़ाई न रुके। इसी सोच के साथ छात्रवृत्ति, छात्रावास अनुदान और मेधावृत्ति की आय सीमा में बड़ी राहत दी गई है।
प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति दरें दोगुनी
‘मुख्यमंत्री पिछड़ा वर्ग एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना’ के तहत अब छात्रों को पहले से दोगुनी राशि मिलेगी।
- कक्षा 1 से 4: ₹1200 वार्षिक
- कक्षा 5 से 6: ₹2400 वार्षिक
- कक्षा 7 से 10: ₹3600 वार्षिक
- छात्रावासी (कक्षा 1 से 10): ₹6000 वार्षिक
यह संशोधन 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी होगा। इस योजना पर सरकार लगभग ₹1751 करोड़ सालाना खर्च करेगी।
छात्रावास अनुदान में 100% वृद्धि
‘मुख्यमंत्री पिछड़ा वर्ग एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग छात्रावास अनुदान योजना’ के तहत जननायक कर्पूरी ठाकुर छात्रावास और अन्य पिछड़ा वर्ग छात्रावासों में रहने वाले छात्रों को अब ₹1000 के बजाय ₹2000 प्रतिमाह मिलेंगे। यह फैसला 1 जनवरी 2026 से लागू होगा और करीब 8,150 छात्र-छात्राएं सीधे लाभान्वित होंगे।
मेधावृत्ति के लिए आय सीमा बढ़ी
अब ‘मुख्यमंत्री पिछड़ा वर्ग मेधावृत्ति योजना’ के तहत पात्रता के लिए अभिभावकों की वार्षिक आय सीमा ₹1.50 लाख से बढ़ाकर ₹3.00 लाख कर दी गई है, ताकि अधिक मेधावी छात्र योजना से जुड़ सकें।
विभाग की माननीय मंत्री श्रीमती रमा निषाद ने इन निर्णयों के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ये कदम पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग के शैक्षणिक सशक्तिकरण में मील का पत्थर साबित होंगे।
इन फैसलों से न सिर्फ शिक्षा तक पहुंच आसान होगी, बल्कि राज्य में सामाजिक समानता और विकास को भी नई गति मिलेगी।



