महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार का कड़ा दबदबा और अचानक विदाई
वो शख्स जो शायद कभी सत्ता से बाहर न हुआ — महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार का कड़ा दबदबा और अचानक विदाई
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की रविवार सुबह बारामती के पास एक चार्टर्ड विमान क्रैश में मौ’त की खबर ने राज्य में शोक की लहर दौड़ा दी है। यात्रा के दौरान विमान रनवे के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया और उसमें सवार पाँच लोगों में से कोई भी जीवित नहीं बच पाया। राज्य और केंद्र की राजनैतिक पारीक्षण उस अचानक और दर्दनाक घटनाक्रम से स्तब्ध हैं।
घटना के शुरुआती विवरणों के अनुसार, अजित पवार मुंबई से बारामती जा रहे थे। विमान लैंडिंग के दौरान अस्थिर दिखा और रनवे के करीब एक खुले मैदान में गिरकर भीषण आग के गोले उठे। दुर्घटना के तुरंत बाद स्थानीय आपात सेवाओं और अग्नि प्रभाग ने मौके पर पहुंचकर कड़ी मशक्कत की, लेकिन विमान के टुकड़े और आग ने बचाव को कठिन बना दिया। अधिकारियों ने बताया कि विमान में कुल पाँच लोग सवार थे — जिनमें अजित पवार के अलावा उनके कुछ स्टाफ और क्रू मेंबर शामिल थे।
अजित पवार का राजनीतिक सफर लंबे समय से महाराष्ट्र की राजनीति का एक महत्त्वपूर्ण अध्याय रहा है। उनका जन्म 22 जुलाई 1959 को देोलाली प्रवारा, अहमदनगर जिले में हुआ था। उन्होंने सहकारी संस्थाओं से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की और 1991 में पुणे डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष के रूप में लंबे समय तक काम किया। बारामती से उनका जनाधार खासकर सहकारी-सुगंधित राजनीति और ग्रामीण वोटबैंक पर गहरा रहा है।
वह बारामती सीट पर कई बार जीतते रहे और महाराष्ट्र के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे। वे छह बार उपमुख्यमंत्री रहे और कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों — विशेषकर सिंचाई व जल संसाधन — का दायित्व संभाल चुके थे। राजनीतिक विश्लेषक उन्हें ऐसे नेता के रूप में देखते थे जिनकी पकड़ राजनीतिक सत्ता पर अक्सर अटूट रहती थी; वे गठबंधन-कूटनीति और क्षेत्रीय रणनीति में कुशल माने जाते थे।
दुर्धटना की खबर के बाद राज्य भर में राजनीतिक हलचल तेज हो गयी। शीर्ष नेताओं ने शोक व्यक्त किया और मामले की तह तक जाने के निर्देश दिए। सरकारी विभागों ने भी आवश्यक जांच, जैसे विमान के रिकॉर्ड, पायलट की योग्यता और मौसम की स्थिति — सभी पहलुओं की तफ्तीश के लिये डीजीसीए और अन्य एजेंसियों से मिलकर जांच शुरू कर दी है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सरकार द्वारा इस त्रासदी के चलते शोक की विधियाँ और आगे के राजनीतिक कार्यक्रमों पर पुनर्विचार किया जा रहा है।
स्थानीय स्तर पर बारामती के लोग और समर्थक हैरान व दुखी दिखे। कई लोगों ने अपने-अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि पवार की उपस्थिति ने क्षेत्रीय राजनीति को एक स्थायी रंग दिया था — विकास योजनाओं, सहकारी संस्थाओं और स्थानीय नेतृत्व के रूप में उनकी छवि मजबूत रही। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि उनके जाने से राज्य के नीति-निर्माण और स्थानीय समीकरणों पर गहरा असर पड़ेगा तथा अगले कुछ हफ्तों में राजनीतिक समीकरणों में बदलाव की संभावना बन सकती है।
वर्तमान में दुर्घटना के कारणों का निर्धारण जांच पर निर्भर है। विमान के तकनीकी पहलू, मौसम, एयर ट्रैफिक कंट्रोल संवाद और एयरलाइन ऑपरेटर के रिकॉर्ड — सभी की विस्तृत पड़ताल की जानी है। साथ ही परिवार और समर्थकों के लिए सरकारी स्तर पर सहायता और आवश्यक प्रक्रियाएँ जारी करने की खबर भी सामने आई है।
अजित पवार न केवल बारामती और महाराष्ट्र के सियासी परिदृश्य का अहम हिस्सा थे, बल्कि उनकी राजनीतिक जीवनी में सत्ता के भीतर बने रहने की उनकी कला और संगठनात्मक पकड़ का अलग ही महत्व था। उनकी अचानक मौत से न केवल परिवार बल्कि राज्य के राजनीतिक मनोविज्ञान में भी एक बड़ा रिक्त स्थान पैदा हो गया है। इस संकट की घड़ी में राज्यवासियों और राजनीतिक समुदाय के लिए यही समय है कि वे शोक व्यक्त करें और जांच के निष्कर्ष का इंतज़ार करते हुए संयम बनाए रखें।




